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इन्स्टाग्राम कोट्स और 4 AM वाली प्रोडक्टिविटी ने हमें रोबोट्स बना दिया है. जब हमारी हर हॉबी एक साइड हसल बन जाए और रिलैक्स करना भी अगले काम के लिए रिचार्ज होना लगे, तो क्रिएटिविटी कहां जाती है? जानिए कैसे हसल कल्चर हमारी कल्पना को खत्म कर रहा है.

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आज कल का सीन काफी weird है, ना? 

instagram खोलो तो rise and grind वाले quotes. linkedin पे जाओ तो hustle till you drop की स्टोरीज, और यूट्यूब पे वही पुराना how to be productive at 4 am वाला ज्ञान.

ऐसा लगता है जैसे rest करना कोई पाप हो गया है. genz को बचपन से यही सिखाया गया कि अगर तुम हर सेकंड कुछ प्रोडक्टिव नहीं कर रहे, तो तुम पीछे छूट रहे हो.

but honestly? इस चक्कर में हमारी क्रिएटिविटी की पूरी तरह से एग्जिट हो गई है. जब दिमाग हमेशा नेक्स्ट डेडलाइन या वायरल रील के बारे में सोच रहा हो, तो ओरिजिनल थॉट्स आने की जगह ही नहीं बचती.

हसल कल्चर ने क्रिएटिविटी को एक फैक्ट्री बना दिया है जहां सिर्फ output मांगते हैं, soul नहीं. हम बस एक ऐसे लूप में फंसे हैं, जहां रेस्ट का मतलब भी 'अगले काम के लिए रिचार्ज' होना होता है, ना कि सच में रिलैक्स करना.

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Photograph: (ai)

productivity का प्रेशर और originality का end game

पहले लोग पेंटिंग, राइटिंग या डांसिंग सुकून के लिए करते थे. पर अब?

अगर आप कोई स्केच बनाते हो, तो पहला थॉट ये आता है कि 'यार, इसकी रील तो अच्छी बनेगी न.' अगर आप कोई नया गाना लिखते हो, तो दिमाग उसे मोनेटाइज करने के तरीके ढूंढने लगता है. 

इस माइंडसेट ने हमारी hobbies को side hustles में कन्वर्ट कर दिया है. जब हम हर क्रिएटिव काम को पैसों या लाइक्स से तोलने लगते हैं, तो हम रिस्क लेना बंद कर देते हैं.

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हम वही बनाते हैं जो ट्रेंडिंग है, वही लिखते हैं जो एल्गोरिदम को पसंद है. इससे हमारा काम unique होने की जगह mid बन के रह जाता है. क्रिएटिविटी को थोड़ा खुला आसमान और बहुत सारा boredom चाहिए होता है. पर हसल कल्चर में वेल्ले बैठना एक क्राइम है.

हमने अपने दिमाग को इतना ऑप्टिमाइज कर दिया है कि अब वो सिर्फ वही सोचता है जो बिकता है.

this is literally the death of imagination, fam.

हम रोबॉट्स बन रहे हैं जो सिर्फ कंटेंट प्रोड्यूस करते हैं, क्रिएटर्स नहीं. जब दिमाग हमेशा on रहता है, तो वो डीप थिंकिंग और नए आइडियाज जनरेट करने की कैपेसिटी खो देता है. हम more is better की रेस में इतने अंधे हो गए हैं कि better को ही भूल गए हैं.

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soft life का कमबैक

हसल कल्चर का सबसे बड़ा स्कैम ये है कि burnout को एक बैज ऑफ ऑनर की तरह दिखाया जाता है. i only slept for 3 hours कोई flex नहीं है, ये एक रेड फ्लैग है, बेस्टी!

जब आप मेंटल एग्जॉशन की स्टेट में होते हो, तो आपका ब्रेन सर्वाइवल मोड में चला जाता है. स्ट्रेस हार्मोन्स हमारे दिमाग के उस हिस्से को ब्लॉक कर देते हैं जो कॉम्प्लेक्स प्रॉब्लम-सॉल्विंग और क्रिएटिव थिंकिंग के लिए जिम्मेदार होता है. बेसिकली, हम जितना ज्यादा हसल करते हैं, हमारा दिमाग उतना ही बेसिक होता जाता है.

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इसी वजह से अब soft life और quiet quitting का ट्रेंड आ रहा है. लोग अब समझ रहे हैं कि 24/7 ग्राइंड करना एस्थेटिक नहीं, टॉक्सिक है. हमें वो मेन कैरेक्टर एनर्जी वापस चाहिए, जहां हम बिना किसी गिल्ट के दोपहर में सो सकें या घंटों दोस्तों के साथ फालतू बातें कर सकें.

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Photograph: (ai)

क्रिएटिविटी तब फ्लरिश करती है जब दिमाग शांत हो, ना कि तब जब वो 50 टैब्स ओपन करके मल्टीटास्किंग कर रहा हो. हमें ग्राइंड से फ्लो की तरफ शिफ्ट होना पड़ेगा. अगर हमने अभी ब्रेक नहीं लिया, तो आने वाले वक्त में हमारे पास सिर्फ ai-जेनरेटेड जैसे बोरिंग आइडियाज ही बचेंगे. इसलिए, थोड़ा लॉग-ऑफ करो, चिल मारो, और अपनी क्रिएटिविटी को थोड़ी सांस लेने दो.

हसल कल्चर ने हमें ये यकीन दिला दिया है कि हम एक human doing हैं, जबकि असलियत में हम एक human being हैं. अगर आपकी पेंटिंग से पैसे नहीं बन रहे, या आपकी लिखी poem ya shayri वायरल नहीं हो रही, तो इसका मतलब ये नहीं कि वो बेकार है. उसका मकसद आपको खुशी देना था, दुनिया को कंटेंट परोसना नहीं.

अगली बार जब आप बिना फोन के बालकनी में बैठकर chai/ coffee/ matcha पिएं और आपको गिल्ट महसूस हो, तो खुद को याद दिलाना कि, doing nothing is actually doing something for your mental health.

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shivani doesn’t seek a title to fill a room. she is a quiet observer trying to understand the world. She wishes to be like rain falling on the sea, a quiet addition to a vast mystery. believing the best stories live between facts and feelings rather than in headlines, she writes about the invisible ways the world softens or breaks us. she isn't an expert at a finish line, but a traveler on the road, writing with a heart wide open to questions even when answers are few.