हिस्ट्री में ऐसे कई किस्से हैं जिनकी vibes ही अलग हैं. ये किसी एक्शन पैक फिल्म से कम नहीं है. कहानी है 5 जून 1967 की. जब इजराइली डिफेंस फोर्स ने मिस्र पर ऐसा massive airstrike किया कि पूरा गेम ही पलट गया. एक ही झटके में हालात totally change हो गए. चलिए अब जानते हैं इजराइल के इस अटैक की inside story...
साल था 1967 और इस टाइम मिडिल ईस्ट की वाइब्ज़? एकदम टॉक्सिक थी. इस कहानी के मेजर character में से एक थे इजिप्ट के प्रेसिडेंट गमाल अब्देल नासिर. नासिर उस समय अरब दुनिया के og influencer थे, अरब दुनिया में उनकी मिलियन्स में फैन फॉलोइंग थी. उनका एक ही सपना था, एक यूनाइटेड अरब वर्ल्ड. उनके इस सपने के बीच में खड़ा था इज़राइल. इसी के चलते दोनों देशों के रिलेशन्स एकदम टेन्स थे.
इजराइल और इजिप्ट के बीच बढ़ी tension
मई के महीने में मैटर और भी सीरियस हो गया. इजिप्ट के प्रेसिडेंट नासिर ने दुस्साहसी फ़ैसला लिया. सिनाई रेगिस्तान इज़राइल और इजिप्ट के बीच का बफर ज़ोन था. नासिर ने वहां तैनात यूएन की पीस कीपिंग फोर्स को बाहर निकाल दिया. उनकी इस एंटी-इज़राइल lobby को जॉर्डन और सीरिया ने जॉइन किया. इराक ने भी धीरे से collab कर लिया. नासिर यहीं नहीं रुके, उन्होंने इज़राइल की नाक के नीचे straits of tiran को ब्लॉक कर दिया.
straits of tiran यानी वो sea passage, जो ग्लोबल ट्रेड की लाइफलाइन था. इसकी ब्लॉकिंग का मतलब था इज़राइल के ट्रेड की क्रैश लैंडिंग. जहां एक ओर नासिर रेडियो पर इज़राइल को delete करने की धमकी दे रहे थे, वहीं इज़राइल के प्रधानमंत्री लेवी एशकोल दुनिया से मदद मांग रहे थे. पर दुनिया ने उनकी गुहार नहीं सुनी.
इजिप्ट, सीरिया, इराक, जॉर्डन की जॉइन्ट टीम के करीब 2 लाख 30 हजार सैनिकों ने इज़राइल को सभी ओर से घेर लिया था. ऐसे मौके पर जब इज़राइल पूरी तरह cornered था, तब एंट्री होती है एक ऐसे मास्टरमाइंड की जो हिस्ट्री की स्क्रिप्ट रीराइट कर देता है. इस कैरिक्टर का नाम था मोशे दयान. ये उस समय इज़राइल के डिफेंस मिनिस्टर थे.
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मोशे दयान ने बदला गेम
उनकी एक आंख पर पट्टी बंधी थी, जो उन्हें एकदम मार्वल के निक फ्यूरी जैसा लुक देती थी. उन्होंने टीमअप किया इज़राइल के एयरफोर्स चीफ मोर्दचाई होड के साथ. इस dynamic duo ने मिलकर एक ऐसा प्लान बनाया, जो लिटरली all-in or nothing था. इस मिशन का नाम रखा गया operation focus और इनकी स्ट्रैटेजी? प्योर जीनियस! प्रॉब्लम ये थी कि इज़राइल जानता था कि इजिप्ट के पास ussr के दिए हुए आधुनिक mig-21 जेट्स हैं, जबकि उसके पास सिर्फ 197 पुराने प्लेन्स थे.
तगड़ी planning के साथ किया अटैक
नॉर्मल लॉजिक कहता है कि ऐसी सिचुएशन में अपने डिफेन्स पर पहला फोकस करना चाहिए. लेकिन, इस जोड़ी ने डिसाइड किया कि नहीं, हम तो अटैक करेंगे और कोई कुछ समझ पाए इससे पहले ही खेल ख़त्म कर देंगे. इन लोगों ने 197 प्लेन्स में से 185 को हमले के लिए भेज दिया.
अपना घर protect करने के लिए सिर्फ 12 प्लेन्स छोड़े. ये रिस्क इतना बड़ा था कि अगर 1% भी एरर होता, तो इज़राइल का चैप्टर वहीं क्लोज हो जाता. लेकिन, इज़राइल स्मार्ट था. उसके पास था एक चीट कोड. उसे पता था कि रडार की एक लिमिटेशन होती है. अगर आप ज़मीन के बहुत करीब उड़े, तो रडार आपको डिटेक्ट नहीं कर पाता.
इज़राइली पायलट्स ने महीनों तक 50 फीट की कम ऊंचाई पर उड़ने की ट्रेनिंग की थी. फिर आया टाइमिंग का मास्टरस्ट्रोक. अटैक का टाइम रखा गया 7 बज कर 45 मिनट. ये time रखने का भी एक reason है. इज़राइल ने मिस्र की आर्मी का full behavioural analysis किया था.
उन्हें पता था कि इजिप्ट के रडार ऑपरेटर्स अपनी शिफ्ट सुबह 7 बजे चेंज करते थे. 7:45 वो टाइम था, जब पुरानी शिफ्ट वाले घर जा चुके होते थे, नई शिफ्ट वाले अभी अपनी कॉफ़ी का पहला सिप ले रहे होते थे और पायलट अपनी पेट्रोलिंग खत्म करके नाश्ते का इंतज़ार करते थे.
काहिरा के ट्रैफिक का भी इसमें important रोल है. ये पीक ट्रैफिक टाइम होता है, जिसकी वजह से सेना के बड़े अधिकारी भी अधिकतर कैरो के ट्रैफिक में फंसे होते थे. इज़राइल ने लिटरली इजिप्ट को caught lacking वाले मोमेंट में पकड़ लिया!
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5 जून को किया अटैक
5 जून की सुबह इज़राइल के जेट्स ने टेकऑफ किया. पहले समंदर की तरफ गए ताकि लगे कि रूटीन training फ्लाइट है. और फिर सडन टर्न लेकर इजिप्ट के एयरबेसेज़ की तरफ बढ़ गए. लेकिन सारी सावधानी के बावजूद जॉर्डन के एक रडार स्टेशन ने ये मूवमेंट नोटिस कर ली.
उन्होंने तुरंत इजिप्ट को वॉर्निंग भेजने के लिए रेडियो पर एक कोड वर्ड भेजा “इनाब”. ये अरेबिक शब्द है, जिसका मतलब होता है 'अंगूर'. ये हमले के लिए बनाया हुआ कोड था. जॉर्डन ने वॉर्निंग दे दी थी कि हमला हो रहा है.
बट यहां हुआ हिस्ट्री का सबसे बड़ा system lag. इजिप्ट ने ठीक एक दिन पहले अपने encryption codes बदल दिए थे और वो जॉर्डन के साथ सिंक नहीं हुए थे. जॉर्डन चिल्लाता रहा अंगूर!, और इजिप्ट वाले उसे invalid password समझकर इग्नोर करते रहे. इस सब से बेखबर, कैरो के मिलिट्री बेस पर सब कुछ एकदम चिल था. ताजी कॉफ़ी, न्यूज़पेपर और नाश्ते का इंतज़ार. रडार ऑपरेटर्स ने लॉग बुक में normal लिखा ही था कि boom!
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11 एयरबेस पर किया अटैक
एक धमाका हुआ, ज़मीन ज़ोर से हिली, हाहाकार मच गया. लोगों को पहले लगा शायद कोई एक्सीडेंट है. फिर दूसरा धमाका... फिर तीसरा! कन्फ्यूजन अब पैनिक में बदल गया. इससे पहले कि कोई कुछ समझ पाता, इज़राइली पायलट्स ने एक-एक करके उनके 11 एयरबेसेज़ पर अटैक किया.
यहां इज़राइली पायलट्स ने pro move दिखाया. उन्होंने पहले प्लेन्स को नहीं, बल्कि रनवे को टारगेट किया. इसके लिए उन्होंने खास इसी ऑब्जेक्टिव से बने anti-runway dibber bombs इस्तेमाल किए. ये बम पैराशूट से नीचे आते, कंक्रीट के अंदर घुसते और फिर होता था explosion. मिस्र के एडवांस्ड जेट्स रनवे पर parked toys बन कर रह गए.
अगले 3 घंटे वॉर स्ट्रैटिजी के प्योर हॉल ऑफ फेम मोमेंट्स थे. ऑपरेशन की प्लैनिंग इतनी सॉलिड थी कि इज़राइल के प्लेन हमला करके जैसे ही अपने बेस पर लौट कर आते, उनकी टीम किसी f1 pit crew की तरह सिर्फ 8 मिनट में प्लेन को रीफ्यूल, री-आर्म करके दोबारा आसमान में भेज देती. वर्ल्ड रिकार्ड पेस ! तीन वेव्स में हमला हुआ और इजिप्ट की एयरफोर्स का 90% हिस्सा खत्म.
दोपहर तक जॉर्डन और सीरिया भी आउट. इसका रिजल्ट ये हुआ कि 450 से ज्यादा प्लेन्स का वही दी एंड हो गया. इज़राइल ने बिना ज़मीन पर एक भी सोल्जर भेजे, एयर superiority हासिल कर ली थी. अरब सेनाओं के लिए ये मिलिट्री हिस्ट्री का सबसे बड़ा सबक़ था.
6 दिन में 3 गुना हुआ इजराइल
इसके बाद इज़राइल के टैंकों ने अगले 6 दिनों में वो किया, जो करने में सालों लगते हैं. उन्होंने सिनाई, गाज़ा, वेस्ट बैंक, पूरा यरुशलम और गोलान हाइट्स को कैप्चर कर लिया. सिर्फ 6 दिनों में इज़राइल का साइज़ 3 गुना बढ़ गया! इजिप्ट के प्रेसिडेंट नासिर का जो स्वैग था, वो एक ही सुबह में स्वाहा हो गया और दुनिया का नक्शा हमेशा के लिए हो गया updated!
पाकिस्तान copy करके फंसा
लेकिन 4 साल बाद, 1971 में, पाकिस्तान ने उसी स्क्रिप्ट को copy करने की कोशिश की. जनरल याह्या खान और उनकी टीम ने ‘operation chengiz khan’ लॉन्च किया, सोच थी कि इंडिया के एयरबेस पर सरप्राइज़ अटैक करेंगे.
3 दिसंबर 1971 की शाम पाकिस्तान ने अमृतसर, पठानकोट, श्रीनगर, जोधपुर समेत 11 एयरबेस टारगेट किए.लेकिन कम जेट्स, गलत टाइमिंग और कमजोर execution की वजह से मिशन का असर लगभग zero रहा. iaf पहले से अलर्ट थी और उसके ज्यादातर एयरक्राफ्ट सुरक्षित थे.
उसी रात इंदिरा गांधी ने देश को संबोधित कर ऐलान किया. “war has been forced upon us.” और यहीं से शुरू हुई 1971 की जंग. 13 दिनों में भारत ने ऐसा जवाब दिया कि 93,000 पाकिस्तानी सैनिकों ने सरेंडर कर दिया और दुनिया के नक्शे पर एक नया देश बना: बांग्लादेश.
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