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हेल्मेट तो पहन लिया पर स्ट्रैप नहीं बांधा? ये तो वही बात हुई कि क्रश को मैसेज तो किया पर सेंड नहीं दबाया. बिना लॉक का हेल्मेट सिर्फ एक महंगा शो-पीस है. अगर चालान और फिजिक्स से बचना है, तो इसे कमिटीड बनाइए. क्योंकि लाइफ में कोई रिस्पॉन बटन नहीं होता.

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हम अपनी रोज़मर्रा की ज़िंदगी में बहुत कुछ ऐसा करते हैं जो हमें लगता है कि कूल है, लेकिन कानून और सेफ्टी की नज़र में वो पूरी तरह foolish यानी बेवकूफी भरा है. अक्सर सड़क पर चलते हुए आप ऐसे लोगों को देखते होंगे जिन्होंने हेलमेट तो पहना है, लेकिन उसका स्ट्रैप यानी फीता ऐसे झूल रहा होता है जैसे उनकी ज़िंदगी की परेशानियां. अगर आप भी उनमें से एक हैं, तो याद रखिए, आप सुरक्षित नहीं हैं, बस किस्मत वाले हैं. और किस्मत की एक्सपायरी डेट कभी भी आ सकती है.

गलतफहमी का शिकार

भारत में लाखों लोग हेलमेट सिर्फ इसलिए पहनते हैं ताकि पुलिस का चालान न कटे. लेकिन सबसे बड़ी गलतफहमी यहीं शुरू होती है. लोगों को लगता है कि सिर्फ सिर पर हेलमेट रख लेना काफी है. इसके लिए उनके पास बहानों की लंबी लिस्ट तैयार रहती है:
"यार बस थोड़ी दूर ही तो जाना है!"
"स्ट्रैप बांधने से लुक खराब हो जाता है."
"पुलिस को तो बस हेलमेट दिखना चाहिए, वो स्ट्रैप थोड़े ही देखेगी."
सच तो ये है कि सड़क हादसे google maps देखकर नहीं होते कि वो सिर्फ लंबी दूरी पर ही होंगे. हादसा कहीं भी और कभी भी हो सकता है.

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हेलमेट और स्ट्रैप का situationship

अगर आप हेलमेट पहनते हैं पर स्ट्रैप नहीं लगाते, तो ये बिल्कुल एक situationship जैसा है. आप कमिटेड तो दिख रहे हैं, पर पूरी तरह से नहीं. सेफ्टी  के लिहाज से ये एक बहुत बड़ा रेड फ्लैग है. कानूनी तौर पर समझें तो, अगर हेलमेट स्ट्रैप से लॉक नहीं है, तो पुलिस आपको 'बिना हेलमेट राइडर' ही मानेगी. जब कॉप्स आपको रोकेंगे, तो उनकी नज़र में आप बिना सेफ्टी  के बाइक चला रहे हैं और आपका चालान कटना तय है.

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Photograph: (ai generated)

helmet rule in india 

मोटर वाहन अधिनियम (motor vehicles act) की धारा 129 बहुत clear है. इसके दो main rule हैं:
01. आपके सिर पर isi सर्टिफाइड हेलमेट होना अनिवार्य है.
02. हेलमेट का स्ट्रैप सही तरीके से बंधा होना चाहिए.

  • अगर आप बिना स्ट्रैप के पकड़े गए, तो इसका सीधा असर आपकी जेब पर पड़ेगा:-
    1000 तक का जुर्माना: ये वो बजट है जिसमें आप दोस्तों के साथ पार्टी कर सकते थे या मूवी देख सकते थे.
  • लाइसेंस सस्पेंशन: आपकी एक छोटी सी लापरवाही आपके ड्राइविंग लाइसेंस को तीन महीने या उससे ज्यादा के लिए सस्पेंड करवा सकती है.

न्यूटन का नियम और हेलमेट का गणित

विज्ञान की भाषा में समझें तो न्यूटन बाबा किसी के सगे नहीं हैं. एक्सीडेंट के वक्त बिना स्ट्रैप वाला हेलमेट सिर से उतनी ही तेज़ी से छिटक कर दूर गिरता है, जितनी तेज़ी से हमारा वीकेंड खत्म होता है. बिना स्ट्रैप के हेलमेट पहनने का कोई फायदा नहीं है, क्योंकि टक्कर लगते ही वह आपके सिर को सेफ्टी  देने के बजाय हवा में उड़ जाएगा.

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डराने वाले आंकड़े 

भारत में हर साल हज़ारों लोग सिर्फ इसलिए अपनी जान गंवा देते हैं क्योंकि हेलमेट उनके सिर पर तो था, लेकिन वो लॉक नहीं था. लगभग 50,000 मौतें सिर्फ इसलिए हुईं क्योंकि हेलमेट का सही इस्तेमाल नहीं किया गया. भारत में हर घंटे लगभग 6 बाइक सवार अपनी जान गंवाते हैं. ये सिर्फ नंबर नहीं हैं, ये किसी के भाई, किसी के पिता और किसी के सबसे अच्छे दोस्त थे.

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Photograph: (ai generated)

सेफ्टी  ही असली फिट चेक है

सीधी बात ये है कि स्ट्रैप न लगाना, हेलमेट न पहनने के बराबर ही है. अपनी ज़िंदगी को जोखिम में डालना कोई समझदारी नहीं है. अगली बार जब आप बाइक की चाबी उठाएं, तो सिर्फ हेलमेट सिर पर न रखें, बल्कि उसे क्लिक की आवाज़ के साथ लॉक भी करें. याद रखें, लाइफ कोई वीडियो गेम नहीं है जहां आपको respawn का बटन मिल जाएगा. यहां एक गलती ही आखिरी गलती हो सकती है. इसलिए, strap it up! क्योंकि सेफ्टी ही वो इकलौता स्टाइल है जो हमेशा ट्रेंड में रहना चाहिए.

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