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एक समय पर सेडान कार को रॉयल माना जाता था, लेकिन आज वही सेडान कार मार्केट से गायब होती जा रही हैं. अब sedan की जगह suv cars का बोलबाला है, अब इसके पीछे क्या वजह है? क्या अब लोगों की पसंद बदल गई है या फिर रोड प्रजेंस और options की कमी की वजह से ऐसा हुआ है.

sedan car

एक वक्त था जब इंडिया में लंबी गाड़ियों यानी की sedan cars को देखकर कहा जाता था, देखो भाई कोई बड़ा आदमी जा रहा. मतलब लंबी गाड़ियां royal मानी जाती थीं. उसे एक तरह से status symbol माना जाता था, लेकिन वक्त के साथ-साथ ये चीजें बिल्कुल change हो गई हैं. अब sedan की जगह suv cars का बोलबाला है. रोड पर आप जैसे ही निकलेंगे, आपको 10 गाड़ियां दिखेंगी. उनमें से ज़्यादातर compact suv या फिर suv देखने को मिलेंगी. now question is आखिर sedan cars मार्केट से गायब क्यों होती जा रही हैं. इसके पीछे क्या कहानी है. क्या सिर्फ लोगों की पसंद बदलने से ऐसा हुआ है या फिर इसके पीछे सड़क और कार कंपनियां भी ज़िम्मेदार हैं? 

इसमें कोई शक नहीं है कि sedan segment इस वक्त सबसे ख़राब हालात में है. अच्छी-अच्छी sedan cars बंद हो चुकी है. हां, कुछ sedan cars की मांग टैक्सी के रूप में ज़रूर हो रही है, लेकिन private vehicles के तौर पर suv को ज्यादा पसंद किया जा रहा है.इसके पीछे एक अहम वजह है रोड प्रजेंस... देखो जब thar, safari, xuv700, creta, seltos, hector जैसी गाड़ियां सड़क पर चलती है तो रौला दिखता तो है, बड़ी गाड़ी high status वाली feeling आती है और मानना पड़ेगा की एक नज़र ऐसी गाड़ियों पर ज़रूर चली जाती है.

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Photograph: (AI IMAGE)

suv की performance अच्छी 

इसे एक example से समझिए, maruti की dzire और mahindra की xuv 300, दोनों गाड़ियां अगर साथ चल रही हों तो आपकी नज़र किस गाड़ी पर जाएगी. इसका जवाब आप ख़ुद जानते हैं. बस यही है road presence, अलग से दिखना अपने आप में ख़ास होता है और शायद इसलिए ये segment लोगों को पसंद आ रहा है. हालांकि, ऐसा कहना पूरी तरह से तो सही नहीं है कि सभी suv की performance अच्छी है, कई sedan भी हैं, जिनकी परफ़ॉर्मेंस अच्छा है. long run की बात करें तो suv पर लोगों का ज्यादा भरोसा है. ऐसा माना जाता है कि suv cars ज्यादा मज़बूत होती है. लिहाजा safety भी ज़्यादा है. कोई अनहोनी होती है तो suv cars में नुकसान के चांसेस भी कम हैं, लेकिन sedan cars में ज्यादा है. 

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options की कमी

पहले sedan cars में काफी ऑप्शन थे. फिर चाहे वो maruti हो या फिर Volkswagen और Skoda जैसी गाड़ियां, इसमें sedan segment में कई सारी गाड़ियां थीं, लेकिन अब ये ऑप्शन काफी कम हो गए हैं. अब maruti में भी luxury sedan car का ऑप्शन न के बराबार है और Skoda- Volkswagen जैसी कंपनियों के पास भी लिमिटेड ऑप्शन है.  Hyundai के पास सिर्फ verna का ही ऑप्शन है और honda के पास भी सिर्फ city का ऑप्शन है. mahindra जैसी कंपनी के पास कभी verito logan car जैसा ऑप्शन था, लेकिन अब एक भी नहीं है. वहीं एसयूवी सेगमेंट में ऑप्शन की कोई कमी नहीं है. 

सेडान की कीमत ज्यादा

एक और वजह है सेडान की मांग कम होने की. एक्चुअली इंडिया में four wheeler के कस्टमर बजट फ्रेंडली हैं, बजट कारों की मांग ज्यादा है. इस एंगल पर सेडान कारें चूक जाती हैं. एक अच्छी सेडान कार का बजट 15 लाख से ऊपर ही बैठता है,वहीं इतने में एसयूवी के बहुत सारे ऑप्शंस हैं. सेडान का लुक और डिजाइन ही उसे प्रीमियम बनाता है और ये प्रीमियमनेस बजट कारों में नहीं मिलती. ऐसे में आप रोड पर देखेंगे तो मारुति की डिजायर,टाटा की टिगोर,कुछ हद तक हुंडई की वरना और होंडा की सिटी ही ज्यादा दिखती हैं क्योंकि ये मिडिल क्लास से लेकर अपर मिडिल क्लास के लिए अफोर्डेबल हैं. इसके ऊपर सेडान कारें bmw,audi या मर्सिडीज की दिखती हैं लेकिन बहुत कम क्योंकि उनका बजट बहुत हाई है.

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14 saal se journalism ke battlefield me active, ashesh gaurav dubey sirf khabrein nahi likhte,woh unhe decode karte hain. digital ho ya tv, studio ki roshni se lekar crime scene ki khamoshi tak, inka focus seedha wahaan hota hai jahan story sirf headline nahi, system ka x-ray hoti hai. Ye un sawaalon ko uthate hain jinke jawab aksar file ke neeche daba diye jaate hain. gen-z vibe ke saath old-school reporting ka combo, jahan narrative tight hota hai aur angle hatke.