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नई कार की खुशी कहीं भारी चालान में न बदल जाए! मॉडिफिकेशन के शौक में युथ अक्सर ऐसी 4 गलतियां कर बैठते हैं जिससे पुलिस गाड़ी तक सीज कर सकती है. क्या आपकी कार में भी तो नहीं हैं ये 'इल्लीगल' एक्सेसरीज?

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कार खरीदने के बाद अक्सर लोग जोश-जोश में ऐसी गलतियां करते हैं जिससे बाद में उनकी टेंशन पीक पर पहुंच जाती है. ज्यादातर यूथ या फर्स्ट-टाइम कार ओनर्स गाड़ी शोरूम से निकालते ही सीधे मॉडिफिकेशन सेंटर पहुंच जाते हैं और ऐसी चीजें करवाते हैं जो रोड पर पूरी तरह इल्लीगल हैं.

आज हम आपको कुछ ऐसे ही मॉडिफिकेशंस बताएंगे जो आपके लिए रेड फ्लैग बन सकते हैं.  

टिंटेड ग्लास 

देखिए, इंडिया में मोटर व्हीकल एक्ट 1989 में साफ कहा गया है कि कार के शीशों पर किसी भी तरह की फिल्म लगाना मना है. दरअसल, कार के अंदर की विजिबिलिटी को लेकर strict rules हैं, जिन्हें हर मैन्यूफैक्चरर फॉलो करता है.

कंपनियां एक तय लिमिट तक ही शीशों को टिंट करती हैं, वो भी बिना किसी एक्स्ट्रा फिल्म के. वो इस बात का ख्याल रखती हैं कि रात में ड्राइव करते वक्त विजिबिलिटी खराब न हो.

दूसरी ओर, आफ्टर-मार्केट सिर्फ फिल्म का ऑप्शन मिलता है, जिसकी क्वालिटी अक्सर चीप होती है और नाइट ड्राइविंग को मुश्किल बना देती है. तो अगर आप भी ब्लैकआउट लुक का सोच रहे हैं, तो प्लीज़ होल्ड! वरना भारी-भरकम चालान पक्का है.

हाई साइज एलॉय व्हील्स

आजकल एक अलग ही फ्लेक्स चल रहा है. एक बढ़िया suv ली, कंपनी वाले एलॉय हटाए और टायर साइज से 1-2 इंच बड़े एलॉय फिट करा लिए. देखने में गाड़ी किलर लग सकती है, लेकिन सच कहें तो ये पूरी तरह फ़ूल वाली हरकत है.

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Photograph: (ai generated)

ट्रैफिक पुलिस कभी भी आपका चालान काट सकती है. नियम ये है कि आप सिर्फ स्टॉक व्हील साइज़ के टायर ही इस्तेमाल कर सकते हैं. अगर आपने ये रूल तोड़ा, तो गाड़ी सीज भी हो सकती है. सो थोड़ा ध्यान दें, क्योंकि अगर आप फंस गए तो पुलिस के साथ-साथ घर पर पापा की डांट का डोज अलग से मिलेगा.

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हेड लाइट एक्स्ट्रा लाइट

कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जो स्टॉक हेडलाइट बल्ब को रिप्लेस कराते हैं और बदले में हाई पावर वाली बल्ब को इंस्टॉल कराते हैं, बट यहां पर ट्विस्ट है.

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दरअसल ऐसा करने से आप खुद के लिए भी परेशानी मोल ले रहे हैं और साथ ही दूसरी की जान को भी खतरे में डाल रहे हैं. रोड पर चलते वक्त अगर आपने हाई पावर बल्ब का यूज किया तो इससे सामने से आ रही गाड़ी के ड्राइवर को देखने में दिक्कत हो सकती है और आंखों के सामने अंधेरा छाने के कारण एक्सीडेंट हो सकता है.

इसके अलावा दिक्कत आपके लिए ये है कि आपने हाई पावर का बल्ब तो लगवा लिया, यहां आप एक बात भूल गए, कार की बैटरी अब ज्यादा यूज हो रही है क्योंकि आपके हेडलाइट के बल्ब का पावर ही हाई है. ऐसे में आपकी बैटरी जल्दी खराब हो जाएगी और उस पर वॉरंटी भी नहीं मिलने वाली और चालान तो कॉम्प्लिमेंट्री मिलेगा ही.

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प्रेशर हॉर्न

नई चमचमाती हैचबैक ली है और उसमें चाहिए क्रेटा वाली फीलिंग? लोग अक्सर आफ्टर-मार्केट से प्रेशर हॉर्न लगवाकर ट्रैफिक में हनहनाते हुए निकलते हैं, पर ये भूल जाते हैं कि हॉर्न के भी डेसीबेल (db) रूल्स होते हैं. अगर हॉर्न सेट लिमिट से ज्यादा लाउड हुआ, तो पुलिस उसे मौके पर ही जब्त कर लेगी और मोटा जुर्माना भी ठोकेगी.

देखिए कार मॉडिफाई कराना गलत नहीं है, बट वो कानून की नजर में लीगल होनी चाहिए. आपसे गुजारिश है कि ऐसे मॉडिफिकेशंस से दूर रहें जो आपको रिस्क में डालें या इल्लीगल हों.

सेफ रहिए और नियमों का पालन कीजिए!

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ashesh gaurav dubey profile imageashesh gaurav dubey
14 saal se journalism ke battlefield me active, ashesh gaurav dubey sirf khabrein nahi likhte,woh unhe decode karte hain. digital ho ya tv, studio ki roshni se lekar crime scene ki khamoshi tak, inka focus seedha wahaan hota hai jahan story sirf headline nahi, system ka x-ray hoti hai. Ye un sawaalon ko uthate hain jinke jawab aksar file ke neeche daba diye jaate hain. gen-z vibe ke saath old-school reporting ka combo, jahan narrative tight hota hai aur angle hatke.