बिहार के सीएम नीतीश कुमार ने एक बड़ा decision लिया है. नीतीश कुमार ने announce कर दिया है कि वो राज्यसभा चुनाव में मैदान में उतरेंगे. बिहार में तकरीबन दो दशक तक सीएम रहने के बाद नीतीश कुमार ने अब संसद के upper house यानी राज्यसभा जाने का फैसला किया है. उन्होंने खुद सोशल मीडिया पर पोस्ट कर राज्यसभा चुनाव लड़ने की बात कही है. उनकी इस announcement के बाद political buzz बढ़ गया है. उनके बाद सीएम की पोस्ट कौन संभालेगा! ऐसे सारे सवाल तो हैं ही. इसी बीच आइए समझते हैं कि आखिर राज्यसभा की पूरी theory क्या है.
नीतीश कुमार के राज्यसभा चुनाव में उतरने के बाद से ही ये elections टॉक ऑफ द टाउन बन गए हैं. ये चुनाव मार्च में होने वाले हैं. election commission ने जानकारी दी है कि 16 मार्च को 10 राज्यों की 37 सीटों पर चुनाव होंगे. ये सीटें अप्रैल में खाली हो रही हैं. साल 2026 में कुल मिलाकर 72 सीटें अलग-अलग फेज़ में खाली होंगी.
राज्यसभा क्या है?
किसी भी कंट्री को चलाने के लिए कुछ लीडर्स चाहिए होते हैं. एक सिस्टम चाहिए होता है. जिसके तहत ये तय होता है कि कौन-से लीडर्स किस लेवल पर decisions ले सकते हैं. इसके लिए इंडिया में एक सिस्टम फॉलो किया जाता है. इंडिया की parliament bicameral है, यानी इसमें दो हाउस होते हैं. एक है- lok sabha (lower house) और एक है राज्यसभा (upper house).
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क्या है difference?
भारत की संसद तीन हिस्सों से मिलकर बनती है. President of India, लोकसभा और राज्यसभा. लोकसभा को 'house of the people' कहा जाता है, जबकि राज्यसभा को 'council of states' कहते हैं. लोकसभा और राज्यसभा नाम Indian parliament ने 1954 में अपनाए थे. दोनों सदनों के काम, power और चुनाव के तरीके में काफी फर्क है.
| लोकसभा | राज्यसभा | |
| क्या कहा जाता है? | हाउस ऑफ पीपल | काउंसिल ऑफ स्टेट्स |
| कैसे चुना जाता है? | नागरिक वोट करते हैं. जीतने के बाद नेता लोकसभा में पहुंचते हैं. | यहां के representatives सीधे जनता नहीं चुनते, बल्कि राज्यों और union territories के representatives उन्हें indirect election के जरिए चुनते हैं. |
| कितना लंबा होता है tenure? | 5 साल | ये एक परमानेंट बॉडी है. ये कभी dissolve नहीं होती है. |
| कौन होता है हेड | स्पीकर | vice president राज्यसभा के chairman होते हैं. |
| member बनने के लिए minimum एज | 25 साल | 30 साल |
| कितनी होती है strength | 552 | 250 |
| क्या होते हैं फंक्शन | ज़्यादातर बिल पहले लोकसभा में पेश होते हैं. वहां पास होने के बाद ये राज्यसभा में जाते हैं. राज्यसभा में चर्चा और मंज़ूरी मिलने के बाद बिल फिर से फाइनल अप्रूवल के लिए लोकसभा में वापस आता है. इस तरह कानून बनाने के पूरे process में दोनों सदनों का अहम रोल होता है. | rajya sabha के पास कुछ स्पेशल पावर होती हैं, जिनका मकसद राज्यों के अधिकारों को protect करना है. अगर कभी केंद्र सरकार राज्यों के अधिकारों में दखल दे, तो राज्यसभा उनके हितों को protect करने में अहम भूमिका निभाती है. |
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लोकसभा है तो राज्यसभा के सांसद क्यों चुने जाते हैं?
- लोकसभा है लेकिन इसके बाद भी राज्यसभा के सांसद चुने जाते हैं. क्योंकि राज्यसभा की अपनी वैल्यू है. लोकसभा के सांसद सीधे जनता वोट देकर चुनती है, जबकि राज्यसभा में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रतिनिधि आते हैं. इससे संसद में सिर्फ जनता ही नहीं, बल्कि राज्यों की आवाज़ भी सही तरीके से पहुंचती है.
- क्रॉस-चेक- राज्यसभा एक तरह से रिव्यू हाउस की तरह काम करती है. लोकसभा में पास हुए बिलों को राज्यसभा भी देखती है, जिससे कानून जल्दबाजी में न बनें. ये क्रॉस-चेक करने का काम करती है.
- राज्यसभा में 12 nominated सदस्य भी होते हैं. जिन्हें arts, literature, साइंस, सोशल सर्विस जैसे एरिया में योगदान के लिए nominate किया जाता है. इससे संसद में experts की राय भी मिलती है.
- permanent house- लोकसभा हर 5 साल में dissolve हो जाती है, लेकिन राज्यसभा permanent body है. इसके सदस्य हर 2 साल में partially बदलते हैं.
- इन सभी reasons की वजह से लोकसभा के साथ-साथ राज्यसभा का होना भी ज़रूरी है. लोकसभा जनता की आवाज़ है, जबकि राज्यसभा राज्यों की आवाज़ और कानूनों की क्रॉस चेंकिंग के लिए platform है.
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कौन-सा हाउस ज़्यादा powerful?
दोनों सदनों के पास अपनी-अपनी ताकतें हैं, लेकिन कुछ मामलों में लोकसभा थोड़ी ज्यादा पावरफुल मानी जाती है. जैसे- लोकसभा के पास सरकार गिराने की ताकत है. money bill को खारिज करने की पावर है. इसके साथ ही अगर दोनों सदनों के बीच किसी बिल पर joint sitting होती है, तो लोकसभा के सांसद ज़्यादा होने की वजह से आखिरकार फैसला उसी के साइड में जाता है.
कैसे होते हैं elect?
अब सबसे अहम सवाल आता है कि राज्यसभा के members को चुना कैसे जाता है. राज्यसभा के सदस्य जनता सीधे नहीं चुनती है. उन्हें राज्यों की विधानसभाओं के चुने हुए विधायक चुनते हैं. यह चुनाव proportional representation के तरीके से होता है, यानी हर पार्टी को उसके विधानसभा में ताकत (सीटों) के हिसाब से प्रतिनिधित्व मिलता है.
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