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आयतुल्लाह अराफी को ईरान का interim supreme leader बनाया गया है. अब ये इस्लामिक रिपब्लिक की कमान संभालेंगे. आयतुल्लाह कोई नाम नहीं बल्कि एक टाइटल होता है.

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ईरान और इज़राइल के बीच conflict बढ़ गया है. इज़राइल और अमेरिका ने ईरान पर 28 फरवरी 2026 को अटैक किया.

इस अटैक में ईरान के सुप्रीम लीडर ayatollah arafiअली खामेनेई की मौत हो गई है. इसी के बाद अब आयतुल्लाह अराफी को power दी गई है. आयतुल्लाह अराफी को interim supreme leader बनाया गया है.

अराफी एक वरिष्ठ मौलवी (senior cleric) हैं. वो ईरान की religious और political hierarchy के अंदर लंबे समय से अहम रोल निभाते रहे हैं.

अब इस conflict के बीच उनके सामने इस्लामिक रिपब्लिक को संभालने का challenge है. ईरान के interim सुप्रीम लीडर कौन हैं. ये जानने से पहले चलिए जानते हैं कि आखिर आयतुल्लाह क्या होता है? 

क्या होता है आयतुल्लाह का मतलब?

आपने नोट किया होगा कि ईरान के सुप्रीम लीडर खामेनेई और अब अराफी सभी के आगे आयतुल्लाह लगा है. हिस्ट्री में जाकर देखे तो खामेनेई से पहले के सुप्रीम लीडर रुहोल्लाह खामेनेई सभी के नाम के आगे आयतुल्लाह लगा है.

आयतुल्लाह कोई नाम नहीं है. बल्कि ये एक टाइटल है. ये टर्म अरबी और फारसी का है. ये एक ऐसा टाइटल है जो हाई-रैंकिंग शिया वरिष्ठ मौलवियों को दिया जाता है.

आयतुल्लाह का टाइटल 19वीं सदी के आखिरी दौर में सामने आया. ये वर्ड तब emerge हुआ जब shia scholarship और religious authority को proper structure दिया जा रहा था.

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ईरान में safavid dynasty के समय ये title ज़्यादा highlight हुआ. फिर टाइम के साथ इसका influence level up होता गया. खासकर ruhollah khomeini के टाइम पर. साल 1979 की iranian revolution के दौरान तो ayatollah title full power mode में आ गया, क्योंकि उसी revolution ने iran में theocratic system set कर दिया.

आज के टाइम में भी ayatollah वाला title shia communities में काफी strong है, खासकर iran, iraq और lebanon में. modern ayatollahs सिर्फ religious figure नहीं होते, उनका political और social matters में भी solid influence रहता है. ये लोग islamic law और ethics को explain करने वाले main interpreters माने जाते हैं.

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आयतुल्लाह अराफी कौन हैं?

आयतुल्लाह अराफी का बर्थ 1959 में meybod, yazd province में हुआ था. वो एक religious family से आते हैं. वो ईरान की religious और bureaucratic institutions में एक्विट रोल निभाते रहे हैं.

उनका करियर अली खामेनेई की लीडरशिप में बूस्ट हुआ. अली खामेनेई ने उन्हें कई अहम रोल दिए. उन्हें पहले meybod और फिर qom में जुम्मे की नमाज़ पढ़ाने का अधिकार दिया.

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अराफी al‑mustafa international university जैसी बड़ी यूनिवर्सिटी के चेयर थे. ये यूनिवर्सिटी ईरान और दूसरे देशों के लिए clerics को ट्रेन करती है. साल 2008 से 2018 तक उन्होंने वहां लीडरशिप संभाली और इसे बड़ा influence वाला centre बनाया.

इसी के बाद साल 2019 में उन्हें guardian council में शामिल किया गया, जो iran में कानूनों और चुनाव उम्मीदवारों को चेक करता है. इस powerful body में होना मतलब political और religious दोनों दुनिया में बड़ा रेस्पेक्ट मिलता है. 

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शाइना परवीन अंसारी उत्तराखंड के अल्मोड़ा से हैं. लेकिन बचपन से दिल्ली में ही रहीं. pg तक की पढ़ाई दिल्ली के जामिया मिल्लिया इस्लामिया में हुई. शाइना को journalism में काम करते हुए 3 साल हो चुके हैं. जामिया से ही मास मीडिया करने के दौरान ही इंटरनशिप और यूट्यूब चैनल में काम किया. जहां एंकरिंग , रिपोर्टिंग, वॉइस ओवर सीखा. उसके बाद पीजी डिप्लोमा इन हिंदी जर्नलिज्म के दौरान कुछ समय भारत 24 के संग गुजारा. जिसके बाद the quint डिजिटल मीडिया के संग काम करने का मौका मिला. फिर न्यूज़ 18 के साथ जुड़ गई. जिसके बाद टीवी9 के साथ बतौर सब एडिटर काम किया. फिलहाल, zingabaad के साथ vibe match हो गई है.