world crisis इस टाइम हर जगह चर्चा में है. ईरान और इज़राइल के बीच की टेंशन बढ़ती जा रही है. ईरान और इज़राइल ने शनिवार को ईरान पर अटैक किया.
इस अटैक में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई की मौत हो गई है. जहां एक तरफ़ ईरान और इज़राइल के बीच की टेंशन बढ़ती जा रही है. वहीं, इसका असर इंडिया में भी पड़ रहा है. crude oil से लेकर basmati rice तक के price हाई हो गए हैं.
इस अटैक के बाद वेस्ट एशिया में geopolitical risk बढ़ गया है. क्रूड ऑयल प्राइस पहले ही ऊपर जा रहे थे. इस बीच इस बढ़ती टेंशन के चलते price high का और भी खतरा बढ़ गया है. अब प्राइस 65 dollar per barrel से spike up होकर 72-73 dollar per barrel तक पहुंच गया है.
क्रूड ऑयल का price हो सकता है हाई?
इस टेंशन में सबसे ज़्यादा challenging ईरान और ओमान के बीच का वो समुद्री रास्ता है जिसको strait of hormuz कहा जाता है. यहीं से 20% of global petroleum liquids के shipments transit होते हैं.
अब world crisis होने की वजह से ये शिपमेंट challenging बन गई है. जबकि strait of hormuz को बंद करने का कोई official statement नहीं आया है. लेकिन, इस रास्ते से पास होने वाले टैंकर और शिप को ईरान की तरफ से अटैक का डर है.
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india में crude oil की कितनी मांग?
इंडिया की रोज़ाना की क्रूड ऑयल की 5.5 मिलियन बैरल खपत है. वो 80% इम्पोर्ट करता है. इंडिया का 1.5-2 मिलियन बैरल रोज़ाना इसी समुद्री रास्ते से आता है. अब इसी के चलते strait of hormuz में ही टेंशन होने की वजह से price पर असर पड़ रहा है.
prashant vasisht, icra में senior vice president and co-group head ने इन सब चीज़ों को लेकर वॉर्निंग दी है. उनका कहना है कि मिडिल ईस्ट में बढ़ता conflict और oil producers पर हो रहे अटैक क्रूड ऑयल प्राइस को और भी volatile बना सकते हैं.
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india कहां-कहां से करता है ऑयल import?
इंडिया बड़ी quantity में क्रूड ऑयल मिडिल ईस्ट से इम्पोर्ट करता है. जिसमें सऊदी अरब, इराक, कुवैत और यूएई जैसे देश शामिल हैं. रिफाइनरी कंपनियां जरूरत पड़ने पर अमेरिका, अफ्रीका या साउथ अमेरिका से भी तेल मंगा सकती हैं.
लेकिन, तेल की कीमत international market के हिसाब से ही तय की जाती है. इसका मतलब ये है कि भले ही ज़रूरत पड़ने पर इम्पोर्ट का सोर्स बदल जाए. लेकिन, अगर इंटरनेशनल मार्केट में कीमत बढ़ती है तो इसका सीधा असर होगा.
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rice पर भी पड़ेगा असर
न सिर्फ क्रूड ऑयल बल्कि middle east में बढ़ते conflict की वजह से rice exports पर भी खतरा मंडरा रहा है. दरअसल, इंडिया बड़ी तादाद में ईरान, सऊदी, अफगानिस्तान जैसे देशों को चावल का एक्सपोर्ट करता है. लेकिन, अब टेंशन बढ़ने के चलते payment delay और shipping disruption का risk बढ़ गया है.
इन सब में सबसे ज़्यादा tension basmati rice को लेकर है. इंडिया के लगभग 50% basmati rice का export सिर्फ 5 west asian देशों से होता है. ये देश हैं सऊदी अरब, ईरान, इराक, यूएई और यमन. मतलब अगर वहां instability लंबी चली, तो सीधा असर trade पर पड़ेगा.
पंजाब और हरियाणा पर इसका सबसे ज़्यादा असर पड़ सकता है. दोनों मिलकर premium basmati exports का करीब 75% हिस्सा देते हैं. हरियाणा का share लगभग 35% है और पंजाब का करीब 40%.
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