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आज हम आपको कुछ ऐसे ईरानी डायरेक्टर्स के बारे में बताने जा रहे हैं, जिन्होंने इंडियन सिनेमा में काम किया. इनमें से कुछ ने इंडियन फिल्म डायरेक्ट भी की हैं.

iranian directors img

iran के सिनेमा के कुछ featured directors ने इंडियन फ़िल्म इंडस्ट्री में अपनी छाप छोड़ी है. इनमें सबसे ज्यादा फ़ेमस नाम majid majidi का है, जिन्होंने साल 2017 में रिलीज़ हुई फ़िल्म 'beyond the clouds' को डायरेक्ट किया. उन्होंने इस फ़िल्म के जरिए मुंबई की गलियों और आम लोगों की ज़िंदगी को अपनी कैमरे की नजर से दिखाया.

वहीं, इतिहास में पायोनियर माने जाने वाले abdolhossein sepanta ने 1933 में lor Girl (1933) बनाने के लिए भारत के स्टूडियो और technology का सहारा लिया था. इन डायरेक्टर्स ने फ़िल्मों के जरिए कहानी सुनाई.

माजिद मजीदी वो डायरेक्टर हैं, जिनका सिनेमा soft but deep, slow but solid और पूरी तरह soul-touching है. जब बाकी दुनिया ग्लैमर और ट्रेंड्स के पीछे भाग रही थी, तब मजीदी कैमरा लेकर आम लोगों, बच्चों, गरीबी, रिश्तों और इंसानियत के पास खड़े थे.

उनकी फ़िल्मों में हीरो कोई सुपरस्टार नहीं होता, बल्कि वो बच्चा होता है जिसके पास जूते नहीं हैं, वो पिता होता है जो अपने बच्चे को समझ नहीं पाता, या वो इंसान होता है जो दुनिया में अपनी जगह ढूंढ रहा है. 'children of heaven' हो या 'the color of paradise' मजीदी ये साबित करते हैं कि बिना शोर के भी सिनेमा straight to heart जा सकता है.

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माजिद मजीदी का इंडिया से कनेक्शन

माजिद मजीदी का इंडिया से कनेक्शन सिर्फ इतना नहीं है कि उन्होंने यहां एक फ़िल्म बना दी, बल्कि उनका काम ऐसा लगा जैसे वो इस देश की धड़कन को सच में feel करके कैमरे में कैद कर रहे हों, जब उन्होंने भारत में 'beyond the clouds' बनाई तो वो किसी outsider की तरह भारत को नहीं देख रहे थे. बल्कि एक आम इंसान की तरह मुंबई की गलियों, वहां की गरीबी, उसके सपनों को समझ रहे थे. ये फ़िल्म full-on grounded, raw और real थी. बिना bollywood के usual drama के, लेकिन emotions के मामले में totally next level. 

beyond the cloud
Photograph: (imdb)

मजीदी ने इंडिया को किसी postcard की तरह नहीं दिखाया, बल्कि मुंबई की झुग्गियों, अस्पतालों, छोटे कमरों और टूटे हुए परिवारों के ज़रिए वो सच्चाई दिखाई जो अक्सर स्क्रीन से गायब रहती है. फ़िल्म में ईशान खट्टर और मालविका मोहनन लीड रोल में नज़र आए थे. उन्होंने इंडियन सिनेमा को ये दिखाया कि silence, simplicity और sincerity भी powerful हो सकती है. इंडियन सिनेमा को crack करना talent से ज़्यादा empathy का game है, और यहीं पर माजिद मजीदी बाकी सभी डायरेक्टर्स से अलग हो गए.

रख़शान बनी-एतमाद

माजिद मजीदी के अलावा ईरान की मशहूर female filmmaker रख़शान बनी-एतमाद का रिश्ता सीधे इंडियन फ़िल्म प्रोडक्शन्स से तो नहीं रहा, लेकिन फ़िल्म फेस्टिवल्स, स्क्रीनिंग्स और इंटरनेशनल फ़िल्म कम्युनिटी में उनके काम ने इंडियन सिनेमा और audience के साथ कनेक्शन बनाया है.

उन्होंने कोई इंडियन फ़िल्म डायरेक्ट नहीं की है, लेकिन times of india की एक रिपोर्ट के मुताबिक 2021 में 52वे  international film Festival of india (iffi) के jury chairperson के रूप में चुना गया था, जहां उन्होंने इंडियन फीचर/डॉक्यूमेंट्री सिनेमा में अपना experience शेयर किया. 

abdolhossein sepanta की lor girl

LOR GIRL
Photograph: (IMDB)

abdolhossein sepanta ईरान के सिनेमा के इतिहास में पायोनियर हैं, जिन्हें ईरानी talkie film का जनक माना जाता है. उनकी सबसे फेमस फ़िल्म 'lor girl' थी,  1933 में आई ये फ़िल्म ईरान की पहली talkie film थी.

इस फ़िल्म में india का अहम technical contribution था. क्योंकि उस समय ईरान में advanced sound और camera facilities मौजूद नहीं थीं. sepanta ने bombay और calcutta के स्टूडियो का इस्तेमाल करके अपने talkie dialogue record किए और Iranian culture, folklore and language को फ़िल्म में शामिल किया. इ

स तरह 'lor girl' सिर्फ ईरान में नई cinematic era की शुरुआत नहीं थी, बल्कि india‑iran cinematic collaboration का पहला historic example भी बन गई. sepanta ने india को केवल technical partner की तरह देखा, लेकिन उनका vision पूरी तरह ईरानी था, जिससे यह cross-border project दोनों देशों के film history में यादगार बन गया.

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सहरा असदोल्लाही की शॉर्ट फिल्म 

SPASM
Photograph: (IMDB)

sahra asadollahi ईरान की नई जनरेशन की डायरेक्टर्स में शामिल हैं, जो शॉर्ट फ़िल्म्स और experimental cinema में माहिर हैं. उनकी शॉर्ट फ़िल्म 'spasm' एक single-take film है. इस फ़िल्म का डायरेक्ट ईरानी डायरेक्टर sahra asadollahi किया, लेकिन इसे प्रोड्यूस इंडियन डायरेक्टर और स्क्रीन राइटर deepankar prakash ने किया.

इस फ़िल्म में indian production के साथ ईरानी डायरेक्टर की creative vision का perfect mix है. spasm ने दिखाया कि modern short films में india और iran के filmmakers मिलकर technical expertise और storytelling sensibility दोनों को integrate कर सकते हैं. 

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indian-iran co-production

hello mumbai
Photograph: (imdb)

ghorban mohammadpour ईरान के डायरेक्टर हैं, जिन्होंने indian-iran co-production फ़िल्म 'hello mumbai' बनाई. साल 2016 में आई यह फ़िल्म एक रोमांटिक‑ड्रामा थी, जिसमें indian actors के साथ काम किया गया.  

mohammadpour ने india में शूटिंग की और cross-cultural narrative तैयार किया. इस फ़िल्म में ईरानी एक्टर mohammad reza golzar और इंडियन एक्ट्रेस dia mirza लीड रोल में नज़र आए थे और इसे ईरान और भारत दोनों देशों में बनाया गया और रिलीज़ किया गया था.

फ़िल्म की कहानी एक इरानी मेडिकल छात्र अली के इर्द‑गिर्द घूमती है, जो मुंबई में कार्डियोलॉजी की ट्रेनिंग ले रहा होता है. एक दिन वह अपनी क्लासमेट करिश्मा की जान बचाता है, जिसके बाद धीरे‑धीरे उनका रिश्ता गहरा होता जाता है और दोनों एक‑दूसरे के लिए inspiration and hope बनते हैं. 

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सहरीन ने 10+2 तक आर्ट्स साइड से पढ़ाई की. शुरुआत से ख़बरें देखना और पढ़ना पसंद था. वक्त के साथ यह पसंद और बढ़ी तो ग्रेजुएशन भी इसी फील्ड में (बैचलर्स जर्नलिजम एंड मास कम्युनिकेशन) किया. मीडिया को और अच्छे से जानने और समझने और खुद को इसी फील्ड के लिए तैयार करने के लिए जामिया मिल्लिया इस्लामिया से PG Diplom in TV Journalism किया. इसी दौरान एबीपी न्यूज़ में मौका मिला तो वहां काम शुरू किया. इसी सफर को जारी रखते हुए TV9 भारतवर्ष में 2 साल बतौर sub-editor 2 साल हिंदी वेबसाइट पर काम किया. zingabad में सहरीन अपने मन की लिखने-पढ़ने और एक्सप्लोर करने के सपने को पूरा कर रही हैं.