shaina parveen ansari profile imageshaina parveen ansari

इंडिया और इज़राइल की relationship timeline काफी interesting है. जहां पहले तो इंडिया ने इज़राइल को recognize करने से इनकार किया. वहीं, फिर ये बहुत टाइम तक situationship में रहे. एंड फिर हुई finally hard launching.

pm modi netanyahu

prime minister नरेंद्र मोदी 25 फरवरी को दो दिन की इज़राइल की विजिट पर जा रहे हैं. पूरे 9 साल बाद वो इजराइल जाने वाले हैं. इज़राइल और इंडिया के realtionship की काफी roller-coaster राइड रही है. एक टाइम ऐसा भी था जब इंडिया ने इजराइल के creation तक का सपोर्ट नहीं किया था.

लेकिन, अब relations में काफी चेंज आ गया है. दोनों strong bond शेयर करते हैं. डिफेंस और सिक्योरिटी से लेकर ट्रेड और टेक तक, इंडिया और इज़राइल के बीच पिछले कुछ सालों में काफी strong bonding हो गई है. 

1930-40s: इंडिया ने इज़राइल के क्रिएशन को किया oppose

ब्रिटिश राज के टाइम इंडिया खुद आज़ादी की फाइट में था, इसलिए वो फिलिस्तीन के साथ खड़ा था. इस टाइम महात्मा गांधी ने साफ कहा था कि फिलिस्तीन अरब लोगों का है और किसी पर कुछ थोपना गलत होगा. 1947 में आज़ादी के बाद इंडिया ने यूएन के उस प्लान के खिलाफ वोट किया जिसमें इज़राइल बनाने की बात थी.

जवाहर लाल नेहरू का स्टैंड क्लियर था. कोई भी सॉल्यूशन तभी चलेगा जब अरब और यहूदी दोनों की सहमति हो, जबरदस्ती नहीं. सीन सिंपल था, उस दौर में इंडिया इज़राइल के creation के खिलाफ था.

ये भी पढ़ें: कौन हैं kim jong un की बेटी, क्यों किया जा रहा पॉलिटिकल सॉफ़्ट लॉन्च?

1950s: इंडिया ने इज़राइल को किया recognize

1950 में ऐसा टाइम आया जब इंडिया ने इज़राइल को recognize तो कर लिया. लेकिन, diplomatic ties बनाने से इनकार कर दिया. scientist albert einstein ने भी 1947 में jawaharlal nehru को लेटर लिखकर इज़राइल को सपोर्ट करने की अपील की.

शुरुआत में नेहरू तैयार नहीं थे, लेकिन आखिरकार 17 सितंबर 1950 को इंडिया ने इज़राइल को officially recognize कर लिया.

नेहरू ने कहा कि इज़राइल एक fact है. लेकिन प्लॉट ट्विस्ट ये था कि recognize करने के बाद भी इंडिया ने तुरंत israel से फुल ऑन diplomatic relations शुरू नहीं किए.

लगभग 40 साल तक सीन ऐसा था कि इंडियन पासपोर्ट से इज़राइल ट्रैवल भी अलाउड नहीं था. मतलब मान्यता मिल गई थी, लेकिन रिश्ते अभी भी low-key ही थे.

ये भी पढ़ें: bangladesh में तारिक रहमान को मिली Power, अब बदलेंगे इंडिया के साथ relations?

1960s: इज़राइल से सीक्रेट कनेक्शन 

1960 के दशक में इंडिया का झुकाव साफ तौर पर फिलिस्तीन की तरफ था. jawaharlal nehru 1960 में गाजा में तैनात un सैनिकों से मिलने भी गए थे. लेकिन, 1962 में जब इंडिया-चीन वॉर हुई, तब वहीं से इज़राइल और इंडिया के relations में twist आया. इज़राइल के david ben-gurion ने नेहरू को लेटर लिखकर हथियार देने की पेशकश की थी.

इंडिया ने हथियार तो ले लिए, लेकिन एक कंडीशन रखी, जो जहाज़ सप्लाई लेकर आएंगे, उन पर israel का झंडा नहीं होगा, ताकि अरब देशों को नाराज़ न किया जाए.

यहीं से इंडिया-इज़राइल का सीक्रेट वाला कनेक्शन शुरू हुआ, जो कई सालों तक चलता रहा. 1965 में पाकिस्तान के साथ वॉर के दौरान भी इज़राइल ने इंडिया को हथियार सप्लाई किए थे.

1970s: इज़राइल से बैकडोर डील 

1971 में जब इंडिया-पाक वार वाला सीन गरम था, तब सरकार ने चुपचाप israel से हथियार लेने का फैसला किया. उस टाइम इंदिरा गांधी पीएम थीं. raw के जरिए सीक्रेट तरीके से वेपन मंगवाए गए. इज़राइल की पीएम golda meir ने बदले में ऑफिशियल पहचान मांगी, लेकिन इंडिया ने उस पर क्लियर हां नहीं की. ट्विस्ट ये था कि इज़राइल से मिलिट्री हेल्प लेने के बावजूद इंडिया का डिप्लोमैटिक सपोर्ट फिलिस्तीन के लिए और स्ट्रॉन्ग हो गया.

दूसरी तरफ 1974 में इंडिया पहला non-arab देश बना जिसने palestine liberation organization को फिलिस्तीनी लोगों का असली प्रतिनिधि माना. सीन साफ था पीछे से इज़राइल से स्ट्रैटेजिक डील चल रही थी और सामने से फिलिस्तीन को ओपन सपोर्ट था. 

ये भी पढ़ें: history repeats: israel ने egypt में मचाई थी ऐसी तबाही, बदल गया था world map

1980s: बैकग्राउंड में इज़राइल से कनेक्शन 

1980s तक सीन कुछ ऐसा था कि इंडिया खुलकर फिलिस्तीन के सपोर्ट में खड़ा था, लेकिन अंदर ही अंदर इज़राइल से सिक्योरिटी टाई-अप भी चल रहा था. plo लीडर yasser arafat अक्सर इंडिया आते थे. 1983 में non-aligned movement समिट के दौरान उन्होंने पीएम indira gandhi को अपनी “सिस्टर” कहा. इससे उस वक्त इंडिया-फिलिस्तीन की नजदीकी साफ दिखती थी.

लेकिन उसी टाइम में israel ने इंडिया को पाकिस्तान के न्यूक्लियर फैसिलिटी पर जॉइंट अटैक का आइडिया दिया, जिसे इंडिया ने मना कर दिया. फिर 1988 में इंडिया दुनिया के शुरुआती non-arab देशों में शामिल हुआ जिसने फिलिस्तीन को एक अलग देश के रूप में मान्यता दे दी. मतलब 80s का वाइब था, फ्रंट स्टेज पर फिलिस्तीन सपोर्ट, बैकस्टेज पर इज़राइल से सिक्योरिटी कनेक्शन.

1990s: इंडिया-इज़राइल रिलेशनशिप हुआ official

इस टाइम पर cold war खत्म हो गई थी. दुनिया single-power mode में थी और इंडिया ने भी अपना डिप्लोमैटिक सॉफ्टवेयर अपडेट कर लिया. 1991 में इकोनॉमी ओपन हुई, us से नजदीकी बढ़ी और जनवरी 1992 में इंडिया ने अपने hidden कनेक्शन को ऑफिशियल बनाने का decision लिया.

यही वो टाइम था जब israel के साथ formal diplomatic ties सेट हो गए. फिर दोनों देशों ने अपने-अपने एम्बेसी tel aviv और new delhi में खोल लिए. 1999 के kargil war में तो इज़राइल ने इंडिया को मिलिट्री सपोर्ट भी दिया. 

2014 के बाद: strong cooperation मोड-ऑन

2000s में ही इंडिया, israel से डिफेंस शॉपिंग का बड़ा कस्टमर बन चुका था. लेकिन, साल 2014 में जब नरेंद्र मोदी आए, तब रिलेशनशिप ने सीधा next level पकड़ लिया. 2015 में उस वक्त के राष्ट्रपति pranab mukherjee इज़राइल जाने वाले पहले भारतीय राष्ट्रपति बने.

फिर 2017 में पीएम मोदी खुद इज़राइल गए. वहां उनकी और benjamin netanyahu की vibe साफ थी- development, tech, innovation, defence इन सबमें close partnership. इसी के बाद साल 2018 में नेतन्याहू भी new delhi आए.

डिफेंस-ट्रेड हुआ boost

डिफेंस में partnership और भी बूस्ट हुई. साल 2021 में indian air force ने इज़राइल में blue flag-2021 exercise में हिस्सा लिया. डिफेंस कंपनियां जैसे elbit systems और rafael advanced defense systems ने इंडिया की adani group और tata advanced systems के साथ पार्टनरशिप भी की. 

साल 1992 में दोनों देशों के बीच जो बिजनेस था वो सिर्फ 200 मिलियन डॉलर का था वो 2024 में बढ़कर 6.5 बिलियन हो गया. इंडिया अब एशिया में इज़राइल का दूसरा सबसे बड़ा ट्रेड पार्टनर है. इंडिया pearls, precious stones, diesel, chemicals, machinery एक्सपोर्ट करता है और petroleum वगैरह इम्पोर्ट करता है. 

ये भी पढ़ें: fintech challenges: एक click और उड़ गए लाखों रुपये... financial technology के क्या-क्या हैं challenges

shaina parveen ansari profile imageshaina parveen ansari
शाइना परवीन अंसारी उत्तराखंड के अल्मोड़ा से हैं. लेकिन बचपन से दिल्ली में ही रहीं. pg तक की पढ़ाई दिल्ली के जामिया मिल्लिया इस्लामिया में हुई. शाइना को journalism में काम करते हुए 3 साल हो चुके हैं. जामिया से ही मास मीडिया करने के दौरान ही इंटरनशिप और यूट्यूब चैनल में काम किया. जहां एंकरिंग , रिपोर्टिंग, वॉइस ओवर सीखा. उसके बाद पीजी डिप्लोमा इन हिंदी जर्नलिज्म के दौरान कुछ समय भारत 24 के संग गुजारा. जिसके बाद the quint डिजिटल मीडिया के संग काम करने का मौका मिला. फिर न्यूज़ 18 के साथ जुड़ गई. जिसके बाद टीवी9 के साथ बतौर सब एडिटर काम किया. फिलहाल, zingabaad के साथ vibe match हो गई है.