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वो रेड फ्लैग थे, फिर भी रात के 2 बजे उसकी फोटो क्यों देख रहे हो? ये दिल का मामला नहीं, आपके दिमाग की एक खतरनाक साजिश है. जानिए उस 'डोपामाइन ट्रैप' का सच, जो आपको एक टॉक्सिक इंसान का एडिक्ट बना देता है... क्या आप बच पाएंगे?

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हम सबने वो phase देखा है. हमारा ब्रेकअप हो गया, हमको पता है वो इंसान हमारे लिए रेड फ्लैग था, पर फिर भी रात के 2 बजे हम उनकी पुरानी फोटोज स्क्रॉल कर रहे होते हैं. 

साइंस इसे trauma bonding कहता है, पर genz की language में कहें तो ये सीधा-सीधा दिमाग का कटना है. ज़िंगाबाद स्टाइल में समझते हैं कि आखिर क्यों हम उन लोगों को मिस करते हैं, जो हमारे मेंटल हेल्थ के लिए बिल्कुल trash थे.

क्या आपको पता है, ये सिर्फ यादों की बात नहीं है, ये आपके दिमाग की वायरिंग का खेल है.

द डोपामाइन ट्रैप

सबसे पहले तो ये समझ लो कि आपका दिल नहीं, आपका ब्रेन आपके मजे ले रहा है. जब हम किसी टॉक्सिक रिलेशनशिप में होते हैं, तो वहां intermittent reinforcement होता है. hainnnn, मतलब?

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Photograph: (ai)

मतलब ये कि कभी बहुत प्यार, तो कभी ghosting. कभी soulmate वाली फीलिंग, तो कभी seen पर छोड़ना. ये जो हाई और लो होते हैं, ये दिमाग में डोपामाइन का एक रोलर कोस्टर क्रिएट करते हैं.

जब वो टॉक्सिक इंसान आपको अटेंशन देता है, तो दिमाग को एक ऐसा रिवॉर्ड मिलता है जो किसी एडिक्शन से कम नहीं.

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breadcrumbing: वो थोड़ा सा प्यार दिखाते हैं और हम उसी के सहारे महीनों निकाल देते हैं.

द एडिक्शन: जब वो चले जाते हैं, तो आपका ब्रेन withdrawal में चला जाता है. आप उन्हें मिस नहीं कर रहे, आप उस डोपामाइन हिट को मिस कर रहे हो, जो उनके एक टेक्स्ट से मिलता था.

भाई, सिंपल है you’re not missing them, you’re just addicted to the chaos. 

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नॉस्टेल्जिया इज अ लायर

दूसरा बड़ा reason है हमारा दिमाग जो सिर्फ गुड वाइब्स याद रखना चाहता है. इसे कहते हैं euphoric recall. हम उनकी सारी टॉक्सिसिटी, गैसलाइटिंग और झगड़े भूल जाते हैं और सिर्फ वो बातें याद रखते हैं जब उन्होंने हमें स्पेशल फील कराया था.

हमारा दिमाग उन्हें एक फिल्टर के थ्रू देखता है (बिलकुल इंस्टाग्राम के फिल्टर जैसा). हम उनके पोटेंशियल से प्यार करते हैं, न कि उनसे जो वो असलियत में हैं.

फैमिलियैरिटी बायस: कभी-कभी टॉक्सिक चीजें भी कम्फर्ट देती हैं क्योंकि वो जानी-पहचानी होती हैं. नया ढूंढना scary लग सकता है, इसलिए हम पुराने टॉक्सिक जोन में रहना सेफ समझते हैं.

better the devil you know than the devil you don't.

द 'आई कैन फिक्स देम' एनर्जी: हममें से बहुत लोगों को लगता है कि हम मेन कैरेक्टर हैं जो उन्हें बदल देंगे. जब वो चले जाते हैं, तो हमें लगता है कि हमारा मिशन इनकंप्लीट रह गया.

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Photograph: (ai)

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ट्रस्ट मी, बेस्टी, आप उन्हें फिक्स नहीं कर सकते. उनका कैरेक्टर डेवलपमेंट उनकी सिरदर्दी है, आपकी नहीं.

उन्हें मिस करना नॉर्मल है, पर उनके पास वापस जाना clown behavior है. आपका दिमाग पुरानी यादों को एडिट करके दिखा रहा है. तो जब भी उनकी याद आए, उनके दिए हुए ट्रॉमा की एक लिस्ट बनाओ और उसे पढ़ो.

सेल्फ-लव ही एकमात्र रास्ता है. इमोशनल ग्रोथ थोड़ी स्लो है, पर हीलिंग aesthetic है.

स्टे हाइड्रेटेड, स्टे अवे फ्रॉम रेड फ्लैग्स, और याद रखो you deserve a green flag!

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shivani doesn’t seek a title to fill a room. she is a quiet observer trying to understand the world. She wishes to be like rain falling on the sea, a quiet addition to a vast mystery. believing the best stories live between facts and feelings rather than in headlines, she writes about the invisible ways the world softens or breaks us. she isn't an expert at a finish line, but a traveler on the road, writing with a heart wide open to questions even when answers are few.