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वो 'ब्लू रास्पबेरी' वाला धुआं सिर्फ वाइब नहीं, एक जहरीला ट्रैप है. जिसे आप फ्लेवर्ड भाप समझकर उड़ा रहे हैं, वो आपके फेफड़ों का स्लो-मोशन मर्डर कर रहा है. 30 दिन का ये डरावना सिमुलेशन देख लो, सारा 'main character' सिंड्रोम उतर जाएगा.

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भागदौड़ भरी लाइफ में स्ट्रेस दूर करने के लिए कोई चाय का सहारा लेता है, तो कोई सुट्टे का. चाहे ऑफिस देखो या कॉलेज, जितने पेन नहीं होते उससे कई ज़्यादा तो लाइटर घूम रहे होते हैं. लेकिन क्या कभी सोचा है कि लंग्स के अंदर आखिर चल क्या रहा है? वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन (who) के डेटा के अकॉर्डिंग, हर 5 में से 1 एडल्ट निकोटीन का एडिक्ट है.

लेकिन ट्विस्ट ये है कि अब लोग ट्रेडिशनल सिगरेट छोड़कर 'चैरी आइस' और 'ब्लू रास्पबेरी' जैसे कूल फ्लेवर वाले वेप्स की तरफ भाग रहे हैं. ons के रीसेंट सर्वे बताते हैं कि अब सिगरेट पीने वालों से ज्यादा नंबर्स वेपर्स की है. लोग इसे हेल्दी अल्टरनेटिव मानकर अपना रहे हैं, पर क्या ये वाकई प्रोटेगनिस्ट वाला मूव है या फिर सिर्फ एक और ट्रैप? चलिए, साइंस और सिमुलेशन के जरिए इसकी असलियत डिकोड करते हैं.

सिगरेट का टॉक्सिक रिलेशन

अगर सिगरेट एक इंसान होती, तो वो यकीनन सबसे टॉक्सिक ex साबित होती. एक सिंगल कश (puff) के साथ आप अपने शरीर में करीब 7,000 केमिकल्स इंजेक्ट करते हैं. इसमें बेंजीन, फॉर्मल्डेहाइड और आर्सेनिक जैसे कार्सिनोजेन्स (कैंसर पैदा करने वाले एलिमेंट) शामिल हैं. अमेरिकन कैंसर सोसाइटी के अकॉर्डिंग, एक सिगरेट में 8 से 43 मिलीग्राम टार होता है, जो धीरे-धीरे आपके फेफड़ों को काला कर देता है.

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visual representation Photograph: (ai generated)

इसके अलावा, सिगरेट से निकलने वाली कार्बन मोनोऑक्साइड आपके खून में ऑक्सीजन की जगह ले लेती है. इसका मतलब है कि आपके दिल और दिमाग को उतनी ऑक्सीजन नहीं मिलती जितनी उन्हें चाहिए. ये सिर्फ फेफड़ों की बीमारी नहीं है, बल्कि ये आपके डीएनए तक को म्यूटेट कर सकता है. ईज़ी लिंगो में कहें तो, सिगरेट पीना अपने शरीर के साथ एक ऐसा बेटिंग वाला गेम है जिसमें जीतना नामुमकिन है.

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95% कम रिस्क, लेकिन...

वेपिंग को लेकर अक्सर ये कहा जाता है कि ये स्मोकिंग से 95% कम हार्मफुल है. एनएचएस (nhs) और अदर हेल्थ ऑर्गनाइजेशन भी मानती हैं कि शॉर्ट-टर्म में वेपिंग, सिगरेट के मुकाबले काफी कम जोखिम भरी है क्योंकि इसमें 'कंबशन' (जलने का प्रोसेस) नहीं होता. जब आप वेप करते हैं, तो आप धुआं नहीं बल्कि 'वेपर' अंदर लेते हैं, जिसमें टार और कार्बन मोनोऑक्साइड नहीं होते.

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लेकिन यहां एक बड़ा but है. वेपिंग healthy नहीं, सिर्फ less harmful है. वेप्स में भी निकोटीन होता है, जो आपकी हार्ट रेट बढ़ाता है और arteries को सिकोड़ देता है. ब्रिटेन जैसे देशों में regulated वेप्स में हार्मफुल केमिकल्स बैन हैं, लेकिन illegal या घटिया क्वालिटी के वेप्स में lead, निकल और डायसेटाइल जैसे खतरनाक element पाए जाते हैं.

डायसेटाइल वही केमिकल है जिससे 'पॉपकॉर्न लंग' जैसी serious illness हो सकती है. यानी, अगर आप नॉन-स्मोकर होकर वेपिंग शुरू कर रहे हैं, तो आप अपनी लाइफ को upgrade नहीं, बल्कि खतरे में डाल रहे हैं.

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जब zingabad की टीम कॉलेज कैंपस पहुंची, तो हमारी नज़र ऋतिक पर पड़ी, जो हाथ में एक नियॉन कलर का वेप पकड़े बड़े टशन में धुएं के छल्ले बना रहे थे. जब हमने उनसे पूछा कि भाई, ये जो 'फ्लेवर्ड धुआं' उड़ा रहे हो, इसका अंजाम पता है? तो ऋतिक का जवाब एकदम chill था: 

'देखो यार, सच बोलूं तो सिगरेट से तो हजार गुना बेटर है. उसमें राख (ash) होती है, हाथ गंदे होते हैं, और बदबू आती है. आज की लाइफ में स्ट्रेस इतना है कि इंसान को कुछ तो चाहिए. अब सिगरेट पीता तो लोग 'नशेड़ी' बोलते, कपड़ों से स्मेल आती, ऊपर से वो कड़वा टेस्ट. इसमें क्या है? बढ़िया 'मैंगो' वाइब है, कोई गंदी स्मेल नहीं और कूल दिखता है. जब सब कह रहे हैं कि ये 95% सेफ है, तो फिर टेंशन किस बात की? ये तो बस 'फ्लेवर्ड भाप' है भाई, और कुछ नहीं!'

ऋतिक के दावों का 'post-mortem',  'सिर्फ फ्लेवर्ड भाप है भाई!' ऋतिक जिसे भाप (water vapor) समझ रहे हैं, साइंस उसे एरोसोल (aerosol) कहती है. भाप सिर्फ पानी होती है, लेकिन वेप का धुआं एक केमिकल कॉकटेल है. इसमें निकोटीन के अलावा formaldehyde (वही केमिकल जो डेड बॉडीज को प्रिजर्व करने के काम आता है) और acrolein (एक तरह का हर्बिसाइड) होता है.

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30 दिन का चैलेंज:

'untold healing' के एक सिमुलेशन ने दिखाया है कि अगर आप 30 दिनों तक रोज वेप करते हैं, तो आपका शरीर कैसे रिएक्ट करता है. ये प्रोसेस instant शुरू होता है:

  • 7 सेकंड के अंदर: निकोटीन आपके ब्रेन रिसेप्टर्स तक पहुंचता है और 'डोपामाइन' (happy hormone) रिलीज करता है. आपको एक high महसूस होता है.
  • 5 दिन के अंदर: आपका दिमाग इस हिट का आदी होने लगता है. साइंटिस्ट्स का कहना है कि निकोटीन की लत कोकीन और हेरोइन जितनी ही खतरनाक हो सकती है.
  • 3 हफ्ते के अंदर: भले ही आप सिगरेट न पी रहे हों, लेकिन वेपिंग से खांसी, घरघराहट (wheezing) और सांस लेने में तकलीफ शुरू हो सकती है.
  • 30 दिन बाद: आपका शरीर निकोटीन पर पूरी तरह निर्भर हो जाता है. अगर आप इसे छोड़ने की कोशिश करेंगे, तो चिड़चिड़ापन, नींद न आना और strong cravings जैसे विड्रॉल सिम्टम्स आपका पीछा करेंगे.

कुल मिलाकर बात ये है कि अगर आपको लग रहा है कि सिगरेट छोड़ने के लिए वेपिंग एक 'सेफ रास्ता' है, तो आप सिर्फ अपना नशा बदल रहे हैं, अपनी लत नहीं.

साइंटिस्ट्स इसे 'डिजिटल ट्रैप' कहते हैं, क्योंकि यहां आप धुएं से बचकर केमिकल के दलदल में फंस रहे हैं. और अगर आप सिर्फ aesthetic दिखने और कूल  बनने के चक्कर में इसे शुरू कर रहे हैं, तो याद रखें, असली flex स्वस्थ फेफड़े और ताज़ी सांसें हैं, ये flavoured clouds नहीं. अपनी बॉडी के साथ ये जुआ खेलना बंद करो, क्योंकि इस गेम में जैकपॉट सिर्फ हॉस्पिटल का बिल है.

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shivani doesn’t seek a title to fill a room. she is a quiet observer trying to understand the world. She wishes to be like rain falling on the sea, a quiet addition to a vast mystery. believing the best stories live between facts and feelings rather than in headlines, she writes about the invisible ways the world softens or breaks us. she isn't an expert at a finish line, but a traveler on the road, writing with a heart wide open to questions even when answers are few.