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भारत का सबसे बड़ा जियो-पॉलिटिकल सस्पेंस सिर्फ 22 किमी के एक कॉरिडोर में छिपा है. अगर ये narrow रास्ता चोक हुआ, तो क्या भारत अपने 8 राज्यों को खो देगा? जानिए क्यों दुनिया की सुपरपावर्स की नज़रें भारत की इस bottle neck पर टिकी हैं.

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अगर आप इंडिया के मैप को ज़ूम-इन करेंगे, तो आपको दिखेगा कि पूरा नॉर्थ-ईस्ट बाकी देश से ज़मीन के एक बहुत ही नैरो हिस्से से जुड़े हैं.

इसे ही दुनिया 'चिकन नेक' (chicken's neck) कहती है, और यकीन मानिए, ये नाम कोई मज़ाक नहीं है. ये भारत की वो 'नस' है जिसे अगर दुश्मन ने टारगेट किया, तो देश के आठ राज्य मेनलैंड इंडिया से पूरी तरह कट सकते हैं, और वो है

  • अरुणाचल प्रदेश
  • असम
  • मणिपुर
  • मेघालय
  • मिज़ोरम
  • नागालैंड
  • सिक्किम
  • त्रिपुरा

ये कोई आम ज़मीन नहीं, बल्कि ग्लोबल जियो-पॉलिटिक्स का वो 'प्रेशर पॉइंट' है जहां ज़रा सी हलचल भी इंटरनेशनल लेवल पर हलचल मचा देती है.

जियो-पॉलिटिकल थ्रिलर

इस कॉरिडोर की लोकेशन किसी हाई-स्टेक्स इंटरनेशनल थ्रिलर मूवी जैसी है. इसकी चौड़ाई कहीं-कहीं सिर्फ 17 से 22 किलोमीटर है यानी एक तरफ से दूसरी तरफ आप कुछ ही मिनटों में गाड़ी चलाकर पहुंच सकते हैं. इसके आस-पड़ोस में नेपाल, बांग्लादेश और भूटान जैसे देश हैं, लेकिन असली टेंशन उत्तर में बैठे चीन से आती है.

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Photograph: (drishti ias)

चीन की चुम्बी घाटी (chumbi valley) इस नेक के इतने करीब है कि वहां से इंडिया की इस लाइफ़लाइन पर सीधे नज़र रखी जा सकती है. ये बिल्कुल वैसा ही है जैसे आप एक बहुत संकरी गली से गुज़र रहे हों और ऊपर किसी ने स्नाइपर सेट कर रखा हो.

2017 का डोकलाम विवाद इसी का ट्रेलर था, जब चीन सड़क बनाकर इस 'गर्दन' के और करीब आना चाहता था. लेकिन इंडियन आर्मी ने वहां बहुत ही 'सैवेज' तरीके से उन्हें ब्लॉक कर दिया.

मिलिट्री का 'बीस्ट मोड'

क्योंकि ये रास्ता नॉर्थ-ईस्ट के लिए इकलौती सड़क और रेल लाइफ़लाइन है, इसलिए भारत ने यहां अपनी सेफ्टी को 'बीस्ट मोड' में डाल रखा है. अगस्त 2024 में बांग्लादेश के हालात बदलने के बाद यहां का माहौल थोड़ा और टेंस हो गया है. नई रिपोर्ट्स की मानें तो अब पाकिस्तान की isi और चीनी चालबाज़ियों को देखते हुए भारत ने अपनी स्ट्रैटेजी बदल दी है.

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सिर्फ बॉर्डर सिक्योरिटी के भरोसे रहने के बजाय, आर्मी ने यहां तीन नए मिलिट्री स्टेशन्स (असम के धुबरी, बिहार के किशनगंज और बंगाल के चोपड़ा में) तैनात कर दिए हैं. यहां राफेल जेट्स, t-90 टैंक, और s-400 एयर डिफेंस सिस्टम 24/7 रेडी रहते हैं.

अब अगर कोई भी गड़बड़ हुई, तो इंडियन आर्मी का रिस्पॉन्स टाइम 'घंटों' से घटकर 'मिनटों' में आ गया है. यहां तैनात 'त्रिशक्ति कॉर्प्स' किसी भी घुसपैठ को on the spot खत्म करने की ताकत रखते हैं.

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इकोनॉमिक पावरहाउस और 'प्लान-B' की तैयारी

ये कॉरिडोर सिर्फ लड़ाई का मैदान नहीं है, बल्कि भारत की 'एक्ट ईस्ट पॉलिसी' का इंजन भी है. भूटान और नेपाल के साथ होने वाला बड़ा ट्रेड और दार्जिलिंग-सिक्किम का टूरिज्म इसी रास्ते पर टिका है.

लेकिन स्मार्ट प्लेयर हमेशा एक बैकअप रखते हैं. भारत को पता है कि सिर्फ एक ही रास्ते पर डिपेंड रहना रिस्की है, इसलिए हम 'ट्रांजिट डिप्लोमेसी' का इस्तेमाल कर रहे हैं.

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हम बांग्लादेश के साथ मिलकर नए रेलवे और पोर्ट कनेक्टिविटी रूट्स डेवलप कर रहे हैं. मकसद साफ है, अगर कभी 'चिकन नेक' पर कोई मुश्किल आई, तो हमारे पास बांग्लादेश के ज़रिए नॉर्थ-ईस्ट तक पहुंचने का एक 'सीक्रेट डोर' तैयार रहे.

ये कनेक्टिविटी ही इंडिया की यूनिटी का असली 'ग्लू' है. सिलीगुड़ी कॉरिडोर भले ही दिखने में छोटा और नाजुक लगे, लेकिन ये इंडिया का असली 'पावर-पॉइंट' है. इसे सेफ रखना सिर्फ बॉर्डर की सिक्योरिटी नहीं, बल्कि भारत के फ्यूचर को सिक्योर रखने का मिशन है.  

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shivani doesn’t seek a title to fill a room. she is a quiet observer trying to understand the world. She wishes to be like rain falling on the sea, a quiet addition to a vast mystery. believing the best stories live between facts and feelings rather than in headlines, she writes about the invisible ways the world softens or breaks us. she isn't an expert at a finish line, but a traveler on the road, writing with a heart wide open to questions even when answers are few.