protest for women, प्रोटेस्ट फॉर human rights, प्रोटेस्ट फॉर labour laws... ये सब तो आपने सुना होगा. लेकिन, राजस्थान में पिछले दिनों environment को लेकर बिश्नोई समाज rebel मोड में दिखाई दिया. राजस्थान में एक खास पेड़ खेजड़ी को protect करने के लिए प्रोटेस्ट हुआ.
सुभाष बिश्नोई जोकि अखिल भारतीय जीव रक्षा बिश्नोई सभा (All India Jeev Raksha Bishnoi Sabha) के प्रदेश उपाध्यक्ष हैं, उनका कहना है कि 6-7 सालों से 30 लाख से ज्यादा पेड़ कटे हैं.
2 फरवरी से शुरू हुए इस प्रोटेस्ट की हीट डे बाय डे बढ़ती गई. protestors का आरोप था कि बिना सोचे-समझे सोलर पैनल install करने के लिए पेड़ों की कटाई की गई. नॉट जस्ट adults बल्कि बच्चे और बुजुर्ग भी स्टैंड लेते दिखे. सभी की एक ही डिमांड थी कि खेजड़ी के पेड़ काटने पर इंस्टेंट रोक लगाई जाए. सरकार ने इस डिमांड पर एक्शन लिया है.
कई दिनों तक चले इस खेजड़ी बचाओ मूवमेंट का पॉज़िटिव एंड हुआ. 2 फरवरी से बीकानेर में चल रहा प्रोटेस्ट 13 फ़रवरी को तब खत्म हुआ जब भजनलाल शर्मा सरकार ने लिखित में भरोसा दिया कि पूरे राजस्थान में खेजड़ी पेड़ों की कटाई पर फ़ुल बैन रहेगा, जब तक नया कानून लागू नहीं हो जाता.
मंत्रियों ने official order जारी किया और कहा कि जो भी illegal कटाई करेगा, उस पर एक्शन होगा. इसी के बाद फिलहाल प्रोटेस्ट खत्म हो गया है. लेकिन, जानते हैं कि आखिर खेजड़ी पेड़ के लिए प्रोटेस्ट हो क्यों रहा था? इसकी importance क्या है?
खेजड़ी पेड़ की क्या है importance
खेजड़ी पेड़ अहम है. इसको ट्री ऑफ़ लाइफ़ कहा जाता है. राजस्थान में बारिश कम होती है और लैंड ज्यादातर ड्राई मोड पर रहता है. गर्मियों में temperature और भी हाई हो जाता है. environment की वजह से यहां बहुत कम पेड़ है. लेकिन, ऐसी सिचुएशन में भी जो पेड़ survive कर पाता है वो खेजड़ी है. इसी के चलते यह काफ़ी अहम हो जाता है.
सुभाष बिश्नोई कहते हैं, ''यह पेड़ बिना पानी के भी हरा-भरा रहता है, जून-जुलाई में भी पेड़ पर सांगरी (Desert Bean) ग्रो होती है. ये पेड़ 24 घंटे ऑक्सीजन देता है.''
सुभाषआगे कहते हैं, ''पश्चिमी राजस्थान के खेतों में यहीं पेड़ पाया जाता है. साथ ही इसकी religious importance को हाइलाइट करते हुए उनका कहना है, पूरे सनातन समाज के अंदर यह अहम है. बर्थ से लेकर डेथ तक इस पेड़ की अहमियत है.''
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बिश्नोई-खेजड़ी कनेक्शन?
राजस्थान में मोस्टली बिश्नोई समाज के लोग रहते हैं. ये समाज environment के काफ़ी क्लोज़ है. ये क्यों क्लोज़ है इसकी स्टोरी काफी इंटरेस्टिंग है. बिश्नोई लोग 15वीं सेंचुरी के संत गुरु जम्भेश्वर पर फेथ रखते हैं. उनके बताए गए 29 नियम को ही सभी फ़ॉलो करते हैं.
इन 29 रूल्स में से 7 अच्छे social behavior से जुड़े हैं, 10 रूल्स cleanliness और हेल्थ से जुड़े हैं, 4 रोज की पूजा के लिए हैं और 8 पेड़ों और जानवरों की प्रोटेक्शन के हैं. बिश्नोई समाज के लिए पेड़ की प्रोटेक्शन और भी अहम इसीलिए हो जाती है क्योंकि ये उनके अहम रूल्स में से एक है.
अखिल भारतीय बिश्नोई महासभा मंदिर हिसार के ex secretary अशोक खोखर का कहना है कि ये पेड़ हवा देते हैं, छाया देते हैं, इनमें फलियां होती हैं जिनसे सब्जी बनती है. इनसे दवा भी बनती है. इसी के साथ यह जानवरों के चारे के लिए भी काम आते हैं. यह पेड़ काफी काम के हैं. हमारा समाज पेड़-पौधों के करीब हैं.
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क्यों हो रही है पेड़ों की कटाई?
प्रोटेस्ट के दौरान हमने अशोक खोखर से भी बात की है. वो कहते हैं कि सोलर पैनल लगाए जा रहे हैं इसीलिए पेड़ों को काटा किया जा रहा है. सोलर पैनल को लगाने के लिए बड़ी जगह चाहिए होती है. इसी वजह से पेड़ों की मास-कटिंग हो रही है.
इसी को oppose करने के लिए यह प्रोटेस्ट हो रहा है. सुभाष बिश्नोई कहते हैं कि पिछले 6-7 सालों में 30 लाख से ज्यादा पेड़ कटे हैं. सोलर प्लांट की वजह से पेड़ों की कटाई हो रही है. पेड़ों को बिना काटे आप सोलर प्लांट्स लगाइए.
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सरकार से क्या हैं डिमांड
इस प्रोटेस्ट के थ्रू सरकार से कई डिमांड की गई. रिछपाल फौजी (Ex-Army) कहते हैं कि सरकार से पेड़ों की कटाई को लेकर सख्त कानून बनाने की मांग की गई. उनका कहना है कि सरकार ऐसे लॉ बनाए जिससे पेड़ काटने पर 5 साल की सजा हो और 2 लाख रुपये का फाइन हो. इस प्रोटेस्ट में हंगर स्ट्राइक भी की गई.
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इस प्रोटेस्ट पर अनुपाल खोखर टोकस कहते हैं कि पिछले कुछ सालों में क़रीब 68 लाख पेड़ काटे जा चुके हैं. सरकार को इस मुद्दे पर कुछ करना चाहिए.अनुपाल आगे वार्न करते हैं कि जैसे कि दिल्ली में हम देख रहे हैं कि सांस लेने के लिए ऑक्सीजन की कमी हो रही है. अगर पर्यावरण की इस मुहिम को इग्नोर किया गया तो जैसे पानी ख़रीद कर पीना पड़ रहा है,वैसे ही ऑक्सीजन खरीदनी पड़ेगी. बिश्नोई समाज को पर्यावरण के मुद्दे पर अपनी जान भी देनी पड़े तो तैयार हैं.
पहले भी दिखा रेबेल मोड
ऐसा पहली बार नहीं है कि खेजड़ी पेड़ के लिए हीट बढ़ी है. इससे पहले भी ऐसा विटनेस किया गया है. साल 1730 में भी लोगों ने पेड़ों की कटाई को रोकने के लिए प्रोटेस्ट किया था. जोधपुर के पास खेजड़ली गांव में राजा के आदमी खेजड़ी के पेड़ काटने आए थे. तब अमृता देवी बिश्नोई ने प्रोटेस्ट को लीड किया था. इस साल 363 बिश्नोई लोगों ने पेड़ को बचाने के लिए अपनी जान दे दी थी. real eco-warriors, no cap.
जब राजा को ये सब पता लगा तब उसने पेड़ काटने का काम रुकवा दिया. उसने बिश्नोई समाज से माफी मांगी और ऑर्डर दिया कि बिश्नोई गांवों के पास कभी भी पेड़ नहीं काटे जाएंगे और जानवरों का शिकार नहीं होगा. यह ऑर्डर आज भी फॉलो किया जाता है.
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