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आपको कितने songs याद हैं, आपका जवाब होगा बहुत सारे, फिर अगर पूछा जाए कि उन songs में कौन-कौन से एक्टर्स हैं तो आप ये नहीं बता पाएंगे, लेकिन लिरिक्स जरूर आपको याद होती हैं तो क्या कभी सोचा है कि ऐसा क्यों होता है?

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आप किसी पुराने गाने की हर लाइन गुनगुना तो लेते हैं, लेकिन उस गाने के एक्टर के चेहरे एकदम से आपको याद नहीं आते? स्कूल का कोई फेयरवेल सॉन्ग आज भी याद है, लेकिन उस दिन और मूमेंट में आपके साथ कौन खड़ा था. यह blur हो गया है. क्या कभी सोचा है कि ऐसा क्यों होता है तो यह सिर्फ एक इत्तेफाक नहीं है. इसके पीछे हमारा दिमाग काम करता है. सबसे पहले एक नॉर्मल सी बात समझते हैं. हमारा दिमाग voice और music को बहुत खास तरीके से संभालता है. जब हम कोई गाना सुनते हैं तो सिर्फ word ही नहीं सुनते. बल्कि, उसकी melody, rhythm, beat और emotion सब कुछ एक साथ फील करते हैं. यानी एक ही समय में दिमाग के कई पार्ट काम करने लगते हैं. 

melody हमें इमोशनली टच करती है, rhythm यानी ताल हमारी बॉडी को झूमने पर मजबूर करती है. गाने के words यानी लिरिक्स हमारी language को इफेक्ट करती हैं. इस तरह गाना एक पूरा एक्सपीरियंस बन जाता है और जो चीज़ एक्सपीरियंस बन जाती है. वह हमें हमेशा याद रहती है. अब चेहरों की बात करें, चेहरा पहचानने के लिए mind का एक स्पेशल पार्ट काम करता है. अगर हम किसी को बार-बार देखें. तभी उसका चेहरा अच्छे से याद रहता है, लेकिन अगर मुलाकात कम हो या ध्यान कम दिया गया हो तो हम चेहरा जल्दी भूल जाते हैं.

गाने emotions को कनेक्ट करते हैं  

इसके उलट हम एक गाना बार-बार कभी मोबाइल पर, कभी शादी और पार्टी में सुनते रहते हैं, लेकिन हर बार ये गाने हम देखते नहीं हैं. ऐसे में जब-जब हम बार-बार एक गाने को सुनते हैं तो वह हमारे mind में सेट हो जाता है. इसके साथ ही हम गाने सुनते हुए उन्हें गुनगुनाते भी हैं तो वह हमें याद हो जाते हैं. मजेदार बात ये है कि जब आप उदास होते हैं और कोई special song सुनते हैं तो वो सीधे दिल को छूता है. ऐसे ही जब खुश होते हैं तब भी कोई ऐसा song सुनते हैं, जो आपको सबसे ज्यादा पसंद होता है और आप उसे खुशी से बार-बार सुनना पसंद करते हैं. क्योंकि आपका mind उन songs को emotions के साथ कनेक्ट करता है. जैसे ही हम अपना favorite songs सुनते हैं तो उससे जुड़ी कोई-न-कोई memory सामने आ जाती है. 

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Photograph: (AI जनरेटेड इमेज)

इसे आप ऐसे भी समझ सकते हैं कि song एक key है और यादें एक Lock तो जैसे ही गाना बजता है हमारे यादों की चाबी से ताला खुल जाता है. ऐसा चेहरों के साथ ऐसा कम होता है. चेहरा तब तक खास नहीं बनता, जब तक उसके साथ कोई गहरा इमोशन या इवेंट न जुड़ा हो, लेकिन गाने अक्सर हमारी जिंदगी के खास पलों से जुड़े होते हैं. पहली दोस्ती, पहला प्यार, कोई ट्रेवल या फिर कोई सेलिब्रेसन...बचपन के song आज भी बड़े होकर भी याद रहते हैं. बचपन में सुने हुए songs हमारे दिल और दिमाग में बस जाते हैं.

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rhythm और rhyme भी वजह

scientist भी मानते हैं कि म्यूजिक याद रखने की power को strong बनाता है. कई बार हम देखते हैं कि बुजुर्गों को रोज़मर्रा की बातें तो याद नहीं रहतीं, लेकिन वे पुराने गाने आसानी से गा लेते हैं. इसका मतलब यही हुआ कि music हमारे mind में बस जाता है. इसके पीछ एक और वजह है लय और तुक यानी rhythm और rhyme. गानों में word rhythm और rhyme एक साथ आते हैं. इससे उन्हें याद रखना आसान हो जाता है. जैसे poem याद करना भी easy होता है.अगर गाने के वही words बिना rhythm और rhyme के गा दिए जाएं तो शायद ये गानें, शायरी और poems भी इतनी जल्दी याद न हों.
 
एक बार सोचकर देखिए कि जो गाना आपका favorite है. उसे आपने कितनी बार सुना होगा. शायद सैकड़ों बार... लेकिन वहीं आप किसी चेहरे को आप कितनी बार ध्यान से देखते हैं, बहुत कम. हम अक्सर चेहरों को देखते तो हैं, लेकिन उन्हें याद रखने की कोशिश नहीं करते. viral reels की ही बात करें तो कोई गाने सोशल मीडिया पर अगर ट्रेंड में है तो कुछ ही दिन में लाखों लोगों को उसकी लिरिक्स याद हो जाती हैं, लेकिन वीडियो में दिखने वालों के नाम बहुत कम लोगों को ही याद रहते हैं.  इसका मतलब यह नहीं है कि वह चेहरे important नहीं हैं. बल्कि, वह भी हमारी यादों का हिस्सा होते हैं, लेकिन म्यूजिक में एक खास Strength है, वह सीधे दिल तक पहुंचता है. यही वजह है कि हम songs की लिरिक्स गानों में दिखने वाले चेहरों से ज़्यादा याद रखते हैं. 

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kritanjali maanti hain ki har kahaani mein kai saari layers hoti hain. koshish yahi rehti hai ki bina shor kiye, saaf aur imaandari se baat rakh saken. kritanjali perfect hone ka daava nahi karti, lekin seekhne aur better hone ki koshish hamesha karti rehti hain. zingabad par kritanjali wahi likhti hain jo unhe khud sochne par majboor kare, kyunki inke liye journalism ka matlab hai sawaal poochna, samajhna aur zimmedaari se likhna.