सालों हो गए 'पाइरेट्स ऑफ़ कैरेबियन' की कोई नई फिल्म नहीं आई. कभी कभी लगता है न? कि शाहरुख अब डर-बाज़ीगर जैसी फिल्में क्यों नहीं बनाते या फिर मोहब्बतें और कल हो न हो क्यों नहीं बनतीं.
वैसे ही लगने लगा था कि हॉलीवुड अब 'पाइरेट्स ऑफ कैरेबियन' टाइप फिल्में क्यों नहीं बना रहा. सिनेफाइल्स की अंतरात्मा की आवाज सुन ली है हमारी अपनी देसी गर्ल ने.
उन्होंने नए मसाले के साथ कुछ-कुछ वैसी ही फिल्म बनाई. उसमें एक्टिंग भी की और पैसा भी लगाया. फाइनली फिल्म प्राइम वीडियो पर आ चुकी है और छा भी चुकी है. इस फिल्म का नाम है 'द ब्लफ'. और 'द ब्लफ' उस ऑडियंस को पसंद आने वाली है जिन्हें मसाला फिल्में पसंद हैं.
कहानी
कहानी है एक सीधी-सादी सी औरत अर्सेल (प्रियंका चोपड़ा) की जो किसी टापू में अपने बच्चे और परिवार के साथ रह रही है. लेकिन उसका एक पास्ट है. फिल्म की कहानी जिंदगी की तरह आगे बढ़ती है. जब लग रहा होता है कि सब कुछ नॉर्मल चल रहा है, उसी पल कुछ ऐसा होता है कि बॉडी का दो तिहाई हिस्सा शरीर छोड़ने के बहाने ढूंढने लगता है.
एक बहुत बड़ा समुद्री लुटेरा कैप्टन कॉनर (कार्ल अर्सेल को ढूंढते ढूंढते उसके घर पहुंच जाता है. अर्सेल को ढूंढने के पीछे की अपनी वजहे हैं. और वो वजहें एक नहीं कई हैं. इन वजहों को पूरा करने के लिए शुरू होती है एक खूनी जंग जो न बच्चे देखती है और न बूढ़े.
अर्सेल को इन सबसे निपटना है और वो निपटती भी है. किसी जंगली बिल्ली की तरह. यही है फिल्म की कहानी. कहानी में नया नया जैसा कुछ नहीं है. बहुत सी फिल्में रिवेंज, लूट और मारपीट पर बन चुकी हैं. लेकिन नया ये है कि फिलहाल ऐसी फिल्में नहीं आ रही थीं, तो अब आ चुकी है.
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एक्टिंग
2008 में बॉलीवुड फिल्म आई थी. नाम था 'द्रोणा'. ये वही फिल्म थी जिसमें प्रियंका का एक्शन अवतार जमकर दिखा था. इसके बाद 'डॉन 2' और 'मैरी कॉम' में जब वो पंच मारती दिखीं तो पता चल गया था कि प्रियंका सिर्फ एक्टिंग नहीं, एक्शन भी खूब कर लेती हैं.
- पिछले दिनों आई 'हेड्स ऑफ़ स्टेट' में इदरिस एल्बा और जॉन सीना जैसे स्टार्स के बीच भी प्रियंका फुल एक्शन मोड में दिखी थीं.
- अब 'द ब्लफ़' में तो उन्होंने नेक्स्ट लेवल धमाल मचाया है. कभी शेरनी की तरह दहाड़ती तो कभी जंगली बिल्ली की तरह झपटती प्रियंका ने होमलैंडर की नाक में दम करने वाले बिली बुचर को भी ओवरशैडो कर दिया है.
- बिली बुचर यानी 'द बॉयज़' वाले कार्ल अर्बन. स्टार ट्रेक और द लॉर्ड्स ऑफ द रिंग जैसी फिल्मों में काम कर चुके कार्ल को इंडिया में बड़ी ऑडियंस पहचानती है और पसंद भी करती है.
- 'द बॉयज़' के बाद उनका ऑरा वैसा ही हो चुका है जैसे कोरियन एक्टर मा डॉन्ग सॉक और बॉलीवुड में सलमान खान का. उनकी रूडनेस बिल्कुल वैसे ही दिखी है, एटीट्यूड की चाशनी में लिपटी. खतरनाक पाइरेट के रोल में बेहतरीन लगे हैं.
- फिल्म में और भी कई सारे एक्टर्स हैं जो बड़े नाम भी हैं टेमुरा मॉरिसन और इस्माइल क्रूज कॉर्डोवा, लेकिन इनके पास करने के लिए ज्यादा कुछ था नहीं.
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डायरेक्शन और बाकी चीजें
डायरेक्शन किया है बॉब मार्ले वन लव बनाने वाले बनाने वाले फ्रैंक ई फ्लॉवर्स ने. इन्होंने ही जो बैलेरिनी के साथ मिलकर फिल्म को लिखा भी है. तो चीजें उनके लिए आसान हो गई हैं. जैसा उन्होंने लिखा वैसा ही पर्दे पर उतार भी दिया.
एक्शन
फिल्म की सबसे खास चीज एक्शन ही हैं. जिनकी कोरियोग्राफी ऐसी की गई है कि हर एक्शन साफ़ समझ आता है और इफ़ेक्टिव भी लगता है. एक्शन की खास बात ये भी है कि सभी फिज़िक्स के दायरे में हैं फिर भी किसी साउथ इंडियन फिल्म से कहीं ज्यादा असर छोड़ते हैं.
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दमदार सीन
हर वो सीन दमदार हो गया है जब प्रियंका लड़ती हैं. उनके बारे में बाकी कैरेक्टर्स बिल्कुल वैसे ही समां बांध रहे होते हैं, जैसे तमिल-तेलुगु फिल्मों में हीरो की एंट्री से पहले कोई गांव वाला या दोस्त बोल कसीदे पढ़ रहा होता है. आग का शोला है वो, आंधी नहीं तूफान है वो. आएगा तो बवंडर उठेगा टाइप वाला.
फिल्म में तो एक-दो बार विलेन भी प्रियंका के प्ले किए हुए कैरेक्टर की तारीफ करता दिखता है. एक जगह तो वो प्रियंका के बच्चे से ही कह देता है - 'वो हम नहीं जिनसे तुम्हें डरना चाहिए...' उसके इस डायलॉग के पीछे एक सीक्रेट छिपा होता है जो ये डिकोड कर रहा होता है कि तुम्हारी मां यहां मौजूद सभी कातिलों से ज्यादा खूंखार है.
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कमियां
थोड़ी बहुत कमियों की बात करें तो हां वो भी हैं. जैसे वीएफएक्स वालों का ध्यान कहीं कहीं भटका है. लास्ट का फाइट सीन अच्छी कोरियोग्राफी की वजह से बच गया. वरना सबसे ज्यादा लोचा यहीं पर हुआ है.
कई जगह लाइटिंग और शैडो ऐसी लग रही थी कि साफ़ पता चल रहा था कि क्रोमा का इस्तेमाल किया गया है. इसके अलावा, 2 घंटे से भी कम की होने के बावजूद फिल्म कहीं कहीं लंबी लगती है, उसकी वजह फिल्म की आम सी कहानी के कुछ आम से सीन्स हैं, जिन्हें और अच्छे से डिजाइन किया जा सकता था.
दमदार पॉइंट्स
सबसे दमदार अगर कुछ है तो वो हैं प्रियंका. एक्शन में इतना फुर्तीलापन है जैसे लाइटनिंग थंडर. पलक झपकते ही वो चार्लीज एंजिल्स की तरह हवा से बातें करती दिखती हैं. हर फाइट सीन में वो लाइटनिंग थंडर लगी हैं.
तलवारबाज़ी करते टाइम वो किसी वॉरियर की तरह दिखी हैं. दुश्मन के बॉडी के एक पार्ट से दूसरे पार्ट तक उनका चाकू ऐसे घूमता है जैसे पानी में चप्पू. फिल्म को सिर्फ उनके लिए देख लीजिए, क्योंकि हॉलीवुड में देसी टाइप का मसाला कभी-कभी ही देखने को मिलता है.
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