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एक्टिंग की मास्टरक्लास, राइटिंग का इंटेलेक्चुअल थ्रिल और आत्मा के कंपा देने वाली डरावने सीन्स से भरी पड़ी है ये वाली वेब सीरीज. नाम है from.

from

जो चीज़ हमें समझ नहीं आती वो डराती है, क्योंकि उसके बारे में हमें पता नहीं होता. prime video के शो from की तरह. ‘फ्रॉम’ समझ नहीं आता, इसे बनाया ही इस तरह से गया है.

एक मिनट रुकना, कहीं आपको ऐसा तो नहीं लग रहा है कि 'समझ में नहीं आया' वाली बात negative way में बोली जा रही है. honestly बोलूं तो नहीं...असल में यही तो शो की यूएसपी है कि समझ में बहुत कुछ नहीं आता, लेकिन मज़ा बहुत आता है.

जैसे game of thrones को बहुत अच्छे से लिखा और बनाया गया है, बिल्कुल वैसे ही from को भी बहुत अच्छे से बुना गया है. बस दोनों में फर्क इस बात का है कि एक की बात खूब होती है और दूसरे की तो होती ही नहीं. इसीलिए हम बात कर रहे हैं इसकी.

आप अगर horror और mad writing का mixture चाहते हो, तो मैं सच में बता रहा हूं कि ब्लेयर विच वाइब या stranger things का छोटा भाई वाला horror भूल जाओ, क्योंकि from तो नेक्स्ट लेवल है. 

इस शो में खाल उधेड़ना, हड्डियां तोड़ना, खोपड़ी खोलना आम है. ये तो wrong turn या final destination टाइप्स फिल्मों में देखा है, तो इसमें क्या खास है? ये सवाल आया न आपके दिमाग में? तो wait a minute...मैं बताता हूं कि क्या खास है. 

खास ये है कि इस शो में सब कुछ ज्यादा ब्रूटल दिखता है. क्योंकि यहां वायलेंस करने वाले मारकाट करते टाइम सैटिस्फैक्शन दिखाते हैं. वो मुस्कुराते हैं. वो शिकार के साथ खेलते हैं. ऐसे शिकार जो जीते-जागते इंसान हैं.

story है गजब

कहानी है कुछ आम इंसानों की जो दुनियाभर से पता नहीं कैसे लेकिन एक जगह इकट्ठा हो जाते हैं. फिर शुरू होता है मौत से ज्यादा डर का खेल. जहां कुछ ऐसे लोग भी रह रहे हैं जो बिना किसी वजह के लेकिन अपने मजे के लिए इन सबका शिकार कर रहे हैं. 

क्यों कर रहे हैं ये तो 3 सीजन binge watch के बाद भी नहीं पता चला लेकिन हर शिकार के बाद excitement जरूर बढ़ती है कि भाई अब शायद वजह पता चल जाए.

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writing है कमाल

From की राइटिंग बहुत ज्यादा मैड मैड वाली है. ये शो सिर्फ डर नहीं दिखाता, बल्कि डर को धीरे-धीरे बनाता है. कहानी सवालों से शुरू होती है और हर एपिसोड के साथ नए सवाल जोड़ती जाती है. इंट्रेस्टिंग ये है कि जवाब तुरंत नहीं मिलते, लेकिन सस्पेंस कभी टूटता भी नहीं.

  • स्क्रिप्ट लेयर्स में आगे बढ़ती है. ऊपर से सर्वाइवल हॉरर लगता है, लेकिन अंदर family tension, trust issues और mental pressure की स्टोरी चल रही होती है. हर किरदार का अपना बैकग्राउंड है, जो अनसुलझे सीक्रेट से जुड़ता भी है और उसे और उलझाता भी है. यही उलझन दर्शक को जोड़े रखती है.
  • डायलॉग्स सीधे और नैचुरल हैं. कहीं भी ओवरड्रमैटिक ट्रीटमेंट नहीं दिखता. वायलेंस का इस्तेमाल चौंकाने के लिए नहीं, बल्कि माहौल गहरा करने के लिए किया गया है.
  • सबसे खास बात ये है कि राइटिंग ऐसे की गई है कि वो दर्शक को समझदार मानती है. वो भरोसा करती है कि दर्शक पेशेंस रखेगा, हर पॉइंट को जोड़ेगा और कहानी के साथ सोचेगा. 
  • यही वजह है कि तीन सीजन के बाद भी सीक्रेट जिंदा रहता है और दिलचस्पी बनी रहती है. जॉन ग्रिफिन ने राइटिंग वाले पार्ट को अच्छे से संभाला है.

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horrific है सीन

सोचिए रात में आपकी खिड़की पर नॉक हो और आप जब पर्दा हटाएं तो खूबसूरत से स्माइलिंग फेस आपसे हंसते हुए पूछें कि आ जाओ बाहर.. .. आप उनके चेहरों पर फिदा होकर बाहर गए, और वो उसी खूबसूरती को संभालते हुए आपकी खाल उधेड़ने लग जाएं. 

और जब ये कर रहे हों तब भी आपसे प्यार से बात कर रहे हों, तो आपको कैसा लगेगा. ये सब देखना इतना अजीब लगता है कि हाई और लो बीपी की प्रॉब्लम वाले उल्टियां कर सकते हैं.

एक सीन में तो एक दादी मां जैसी cute and sweet सी दिखने वाली लेडी 5 साल की बच्ची को फुसलाती है और फिर उसकी आंतें निकाल लेती है......,  और इतनी डरावनी चीज भी इतने चिल तरीके से दिखाई गई है कि आप खुद से पूछते हैं, ‘ये सीरियसली हो रहा है या मेरा दिमाग ओवरहीट हो रहा है?’”

from show
web series from Photograph: (imdb)

direction is amazing

कई डायरेक्टर्स ने मिलकर इसके अलग-अलग एपिसोड बनाए हैं. लेकिन जैक बेंडर और जॉन ग्रिफिन का स्टाइल इस शो की पहचान तय करता है.

  • जैक बेंडर किरदारों की मानसिक स्थिति और इमोशनल टेंशन पर फोकस करते हैं. वो सस्पेंस को अचानक झटका देकर नहीं, बल्कि धीरे-धीरे बनाते हैं. 
  • लंबे साइलेंट फ्रेम, क्लोज-अप और कंट्रोल्ड पेसिंग के जरिए डर को अंदर तक बैठा देते हैं. उनके एपिसोड्स में हॉरर सिर्फ वायलेंस नहीं, बल्कि इंसानी प्रतिक्रिया है. उनका गेम ऑफ थ्रोन्स के 6वें सीजन का डायरेक्शन भी किया है. लॉस्ट भी उन्होंने ही बनाया है.

जॉन ग्रिफिन मनोवैज्ञानिक डर को पहले नंबर पर रखते हैं.

  • वो जवाब देने की जल्दी में नहीं रहते. कहानी परतों में खुलती हैं और रहस्य बना रहता है. लिमिटेड लोकेशन और क्लॉस्ट्रोफोबिक माहौल के जरिए वो ऐसा वातावरण बनाते हैं जहां दर्शक भी कैरेक्टर्स के साथ फंस जाता है.
  • दोस्तों डायरेक्टर्स ने यहां डरावना ही नहीं, बल्कि क्रिएटिव भी किया है. सीन कंस्ट्रक्शन ऐसा कि आपका ब्रेन और गट दोनों एक साथ स्क्रीम कर रहे हों. 

उन्होंने इसे हॉरर तो बनाया है, लेकिन भूत-प्रीटेंडिंग या शैतान वाला नहीं. इसका फ्लेवर ही अलग कर दिया है. जो आपको चौंकाता है, डराता है, लेकिन simoltaneously.

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acting is like masterclass

लीड एक्टर जैसा कुछ नहीं है इसमें तो बेसिकली कहानी ही लीड एक्टर है. लेकिन फिर भी सीरीज के पहले सीन से लेकर लास्ट तक सबसे ज्यादा दिखने वाले एक्टर हैरल्ड पैरिनो है, तो फिलहाल स्क्रीनटाइम के हिसाब से उनकी बात करनी जरूरी है. 

  • ये एक्टर मशीनों से लड़ते हुए भी दिख चुके हैं अपने नियो के साथ मैट्रिक्स में. और जैक बेंडर के ही एक और शो lost में भी दिख चुके हैं.
  • भाई एक्टिंग की मास्टरक्लास की तरह दिखा है पूरी सीरीज में. ग्राउंडेड, इंटेंस, इमोशनल दिखना एक साथ काफी भारी काम होता है. और ये वाला भारी काम इन्होंने ही किया है. ये शो के नैरेटर जैसे लगते हैं जो पूरी स्टोरी को आगे बढ़ाते हैं.
  • इसके अलावा जिम मैथ्यूज के किरदार में एयॉन बैली और तैबिथा मैथ्यूज के किरदार में कैटलीना सैंडिनो मोरिनो ने सीरीज में वो ही किया है जो विशाल भारद्वाज की फिल्मों में गुलजार करते हैं.  
  • कैटलीना जॉन विक के स्पिन ऑफ बैलेरीना में भी दिख चुकी हैं. जहां वो खूंखार योद्धा की तरह लड़ती दिखी थी, वहीं सीरीज में वो इतनी बेबस दिखी हैं, कि बेबसी वाली एक्टिंग सीखने के लिए नए एक्टर्स को उनकी एक्टिंग देखनी चाहिए. 
  • सीरीज में स्कॉट मैक्कॉर्ड ने एक बेहद जरूरी लेकिन बच्चों जैसा किरदार निभाया है जो बहुत सेंसिटिव है. उनका काम देखकर वही कमाल दिखेगा जैसे इरफान खान किसी फिल्म में 10 मिनट का कैमियो करके कमाल कर जाते थे. 

इसके अलावा, कई कैरेक्टर्स हैं जो सीरीज की जान हैं, अब अगर सबके बारे में बता दूंगा तो मज़ा खत्म होने वाला इश्यू भी हो सकता है. इसलिए एक्टिंग वाली बात यहीं रोक देता हूं.

from
from Photograph: (imdb)

visuals

विजुअल्स कुछ ऐसे हैं कि आपको लगेगा कि सीरीज नहीं कोई फिल्म देख रहे हैं. वैसे भी डायरेक्टर जैक बेंडर लंबे साइलेंट फ्रेम का इस्तेमाल करके इमोशनल इफेक्ट बढ़ाते हैं. ये यहां भी देखने को मिलेगा.

कैरेक्टर्स भी टॉप नॉच हैं. कोई ओवर द टॉप विलेन नहीं, कोई फोर्स्ड टफ़ गाय भी नहीं. सब कुछ नैचुरल और डायलॉग्स ऐसे कि आप खुद को उनके यूनिवर्स में फील करते हो.

और एक प्लस पॉइंट, जो लोग हॉरर पसंद करते हैं, उन्हें यहां सिर्फ डर नहीं मिलेगा, बल्कि राइटिंग का इंटेलेक्चुअल थ्रिल भी मिलेगा. आप सोचेंगे: यार उसने ऐसा किया ही क्यों.

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एक और डरावना सीन जो समझाता है कितना डरावना है शो

एक और सीन डिस्क्राइब करता हूं. ये अजीब से शिकारी लोग दो दोस्तों को पकड़ते हैं. एक को बांध देते हैं, और दूसरे को तड़पा-तड़पाकर मारते हैं. और बंधे हुए को कोई नुकसान नहीं पहुंचाते सिर्फ उसे मजबूर करते हैं, ये सब होते हुए देखने के लिए. 

वो एक तरफ तो मारने की खुशी फील कर रहे होते हैं, और दूसरी तरफ एक बंधे हुए इंसान को ये सब देखने के लिए मजबूर करके सैडिस्टिक प्लेज़र भी फील कर रहे होते हैं. ये सीन मैसेज था ये दिखाने का कि क्रीपी चीजें कितनी डरावनी हो सकती हैं. बेसिकली प्लॉट वाइज रोलर कोस्टर है.

ये शो आपके ब्रेन और एड्रेनेलाइन दोनों पर एक साथ अटैक करेगा.  ये उस एनर्जी ड्रिंक जैसा है, जो इंस्टैंट एनर्जी तो देता है लेकिन हार्मफुल भी हो सकता है. 

सो गाइज, अगर आप रेडी हो मोस्ट अंडररेटेड हॉरर थ्रिल राइड के लिए, तो अभी जाकर देख लो. ओवर द टॉप सीजीआई, जो आंखें चुंधिया दे जैसा कुछ नहीं मिलने वाला. 

ये शो आपका माइंड ट्विस्ट कर देगा...किसी रस्सी की तरह जो हजारों धागों से मिलकर बनती है. देखने में तो नॉर्मल लगती है, लेकिन उधेड़ो तो इतनी परतें मिलेंगी कि कनफ्यूजन के जाल में फंसते चले जाओगे. इसका अगला सीजन भी इसी साल रिलीज होने वाला है.

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abp news mein entertainment team ka hissa the, uske pehle quint hindi ke sath fact check karne ka punya kaam bhi kar chuke hain. is punya kaam se pehle news 18 mein the. ab zingabad ke sath full vibe set hai. yahan har voh chiz ek sath kar rahe hain jo pehle alag alag jagah par alag alag karte the. video shideo mein bhi dikhte rehte hain.