कहते हैं reality कभी-कभी netflix से भी ज्यादा dark और thriller होती है. रोहित शेखर तिवारी मर्डर केस भी कुछ ऐसी ही था. full-on crime thriller vibes. इसमें सब कुछ था, बेहिसाब पैसा, पॉलिटिकल पावर, property ka टेंशन, trust issues और एक failed marriage ka कड़वा चैप्टर. Plot twist का climax हुआ दिल्ली के ultra-posh और super secure इलाके डिफेंस कॉलोनी के एक बंगले में और उसी सीन ने पूरे देश को शॉक में डाल दिया.
रोहित शेखर तिवारी की जिंदगी किसी रोलर-कोस्टर से कम नहीं थी. उनकी कहानी एक दम फिल्मी है. जहां पिता एक दम rich है. लेकिन, बेटे को बेटा मानने से इनकार कर देते हैं. रोहित की भी यही कहानी थी. उनका बेटा उनको accept करने से इनकार करते थे. वो देश के कद्दावर नेता एन.डी. तिवारी के बेटे थे, लेकिन अफसोस कि पिता ने दशकों तक उन्हें अपना 'खून' मानने से इनकार किया.
acceptance की legal battle
एन.डी.तिवारी up और uttarakhand के सीएम रहे, केंद्र में बड़े पदों पर रहे, लेकिन अपने ही बेटे को वो पहचान नहीं दी जिसके लिए रोहित तरसते रहे. आखिरकार साल 2008 में रोहित ने अपनी identity की फाइट खुद लड़ी. उन्होंने कोर्ट का सहारा लिया और केस file किया. उन्होंने paternity suit दायर किया. 6 साल तक चली इस कानूनी लड़ाई और सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद हुए dna टेस्ट ने बताया कि रोहित के पिता एन.डी. तिवारी ही हैं.
कोर्ट में जीत के बाद वाइब ही चेंज हो गई. साल 2014 में 89 साल की उम्र में एन.डी. तिवारी ने रोहित की मां उज्ज्वला शर्मा से शादी की. रोहित रातों-रात एक बड़ी विरासत के successor बन गए.
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लाइफ में हुई प्यार की एंट्री
इसी दौरान रोहित की जिंदगी में लव की एंट्री हुई. उनकी लाइफ में अपूर्वा शुक्ला आईं. अपूर्वा इंदौर के एक फेमस वकील परिवार से थीं और खुद सुप्रीम कोर्ट में lawyer थीं. एक matrimonial website के जरिए दोनों मिले, बातचीत बढ़ी और साल भर की डेटिंग के बाद मई 2018 में दोनों ने शादी कर ली. लेकिन, शादी के कुछ ही टाइम बाद रिलेशनशिप का downfall शुरू हो गया.
15 अप्रैल 2019 की वो खौफनाक रात
अक्टूबर 2018 में एन.डी. तिवारी के निधन के बाद रोहित काफी mentally disturbed हो गए. अप्रैल 2019 में रोहित अपनी मां और एक female friend के साथ उत्तराखंड वोट डालने गए थे. 15 अप्रैल की रात जब वो दिल्ली लौटे, तो reportedly नशे में थे. पुलिस चार्जशीट के मुताबिक, रात करीब 1 बजे रोहित और अपूर्वा के बीच scene kaafi heated हो गया. बताया गया कि argument की वजह रोहित का अपनी एक female friend के साथ drink करना और समय बिताना था, जिसको लेकर दोनों के बीच tension peak पर पहुंच गई.
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रोहित शेखर की murder mystery
इसी के बाद रूम से रोहित की डेड बॉडी बरामद हुई. अपूर्वा का कहना है कि उनको हार्ट अटैक आया. जबकि चार्जशीट में आरोप है कि बहस के दौरान रोहित खुद को बचा नहीं सके और अपूर्वा ने allegedly तकिए से उनका मुंह और गला दबा दिया, जिससे उनकी मौत हो गई.
फिर पोस्टमार्टम रिपोर्ट सामने आने के बाद twist आया. रिपोर्ट ने 'हार्ट अटैक' के claim को झुठला दिया. डॉक्टरों ने साफ किया कि मौत natural नहीं थी, बल्कि गला दबाने से हुई. दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने जब पूछताछ की, तो अपूर्वा के बयानों में कई contradictions सामने आए. इन्हीं discrepancies के आधार पर जांच आगे बढ़ी और आखिरकार पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया.
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कानूनी पेच और ट्रायल का सफर
इसी के बाद court proceedings शुरू हुईं. जुलाई 2019: पुलिस ने 500 पेज की चार्जशीट दाखिल की, जिसमें अपूर्वा को एकमात्र आरोपी बनाया गया. 2020-21: वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के ज़रिए सुनवाई हुई. फरवरी 2021 में हत्या (धारा 302) के आरोप तय किए गए.
रोहित की मां उज्ज्वला शर्मा ने कोर्ट में गवाही देते हुए अपूर्वा पर property के लालच का आरोप लगाया. एम्स के डॉक्टरों ने बयान दिया कि गर्दन की internal चोटें हत्या की तरफ इशारा करती हैं. वहीं, अपूर्वा के वकीलों ने दलील दी कि यह शराब की लत और खराब सेहत वजह से हुई मौत हो सकती है. जनवरी 2022 में दिल्ली हाई कोर्ट ने लंबी सुनवाई और ट्रायल में देरी का हवाला देते हुए अपूर्वा को जमानत दे दी. फिलहाल मामला ‘फाइनल आर्गुमेंट्स’ की स्टेज पर है.
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