मुंबई की ब्लास्ट स्टोरी सच में नेक्स्ट-लेवल शॉकिंग है. 12 मार्च 1993 को ड्रीम सिटी में huge blast हुए थे. दोपहर 1:30 बजे पहला ब्लास्ट bombay stock exchange के बेसमेंट में खड़ी एक कार में हुआ था.
धमाका इतना जबरदस्त था कि पूरी बिल्डिंग हिल गई. हर तरफ धुआं ही धुआं था. थोड़ी ही देर में 84 लोगों की जान चली गई. लेकिन, ये तो सिर्फ beginning थी. किसी को अंदाजा नहीं था कि नेक्स्ट 140 मिनटों में मुंबई एक war zone में चेंज होने वाला है.
दोपहर 1:47 बजे:
कथा मार्केट के बिजी इलाके में दूसरा धमाका हुआ.
दोपहर 2:30 बजे:
शिवसेना भवन के पास एक पेट्रोल पंप पर blast हुआ. निशाना शिवसेना भवन था, लेकिन डेथ पेट्रोल पंप पर हुईं.
दोपहर 2:35 बजे:
एयर इंडिया बिल्डिंग के सामने खड़ी कार में ब्लास्ट हुआ, 20 लोगों की डेथ हुई.
दोपहर 2:55 बजे:
वर्ली में खड़ी एक जीप अचानक धमाके से उड़ गई और सीन एकदम chaos में बदल गया. पास से गुजर रही bmc की बस भी इसकी चपेट में आ गई. ये उस दिन का सबसे बड़ा ब्लास्ट था. मौके पर ही 113 लोगों की जान चली गई.
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कितने लोगों की गई जान
अगले कुछ मिनटों में जावेरी बाजार, प्लाज़ा सिनेमा, होटल सी रॉक, जुहू का सेंटूर होटल और सहार एयरपोर्ट के पास एक के बाद एक ब्लास्ट हुए. 12 धमाकों ने मुंबई को पूरी तरह शॉक मोड में डाल दिया. शहर एकदम दहल गया था. govt data के मुताबिक, इन blast में 257 लोग मारे गए और 700 से ज्यादा injured हुए.
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babri masjid demolition से कनेक्शन!
blast के बाद पुलिस ने investigation शुरू कर दी. investigation में सामने आया कि ये कोई छोटा-मोटा अटैक नहीं था. सिचुएशन पूरी तरह सीरियस और शॉकिंग थी. सामने आया कि ये एक planned attack था.
इसका मास्टरमाइंड अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम और उसका करीबी टाइगर मेमन था. जांच में सामने आया कि ये सब यूं ही नहीं हुआ था. babri masjid के demolition के बाद भड़के दंगों का बदला लेने की साज़िश रची गई थी.
बताया गया कि पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी inter-services intelligence की हेल्प से इन धमाकों की प्लानिंग हुई. ट्रेनिंग के लिए आतंकियों को दुबई रूट से पाकिस्तान भेजा गया, rdx को सी-रूट के ज़रिए इंडिया तक पहुंचाया गया. पूरा प्लान काफ़ी सीक्रेट और प्री-प्लान्ड था.
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संजय दत्त की गिरफ़्तारी
इस केस ने तब पूरी दुनिया का ध्यान और खींचा जब इसमें बॉलीवुड सुपरस्टार संजय दत्त का नाम आया. उन पर illegal weapons (ak-56) रखने का आरोप लगा, जो उन्हें टाइगर मेमन के सहयोगियों ने धमाकों से पहले दिए थे. संजय दत्त को टाडा (tada) कोर्ट के चक्कर काटने पड़े और उन्हें जेल की सजा भी हुई.
पूरा मामला और भी हाई-प्रोफ़ाइल हो गया, क्योंकि इसमें अंडरवर्ल्ड और फिल्म इंडस्ट्री सबका नाम जुड़ गया था. मुंबई ब्लास्ट का केस इंडियन कोर्ट की हिस्ट्री में सबसे लंबे चलने वाले मुकदमों में से एक रहा.
कोर्ट का फैसला (2006-2007):
जज पी.डी. कोडे ने 100 से ज्यादा आरोपियों को दोषी ठहराया. 12 लोगों को मौत की सजा सुनाई गई और 20 को उम्रकैद हुई.
याकूब मेमन को फांसी
टाइगर मेमन का भाई याकूब मेमन, जो इस प्लानिंग के financial management में शामिल था, पुलिस की गिरफ़्त में आया. लंबी कानूनी लड़ाई के बाद 30 जुलाई 2015 को याकूब मेमन को नागपुर सेंट्रल जेल में फ़ांसी दे दी गई.
इसी केस के दूसरे हिस्से में अबू सलेम और मुस्तफ़ा दौसा जैसे गैंगस्टरों को दोषी ठहराया गया. अबू सलेम को उम्रकैद की सजा सुनाई गई.
कोर्ट ने सज़ाएं दीं, फांसी भी हुई… लेकिन, इस पूरे गेम का alleged मास्टरमाइंड Dawood Ibrahim आज भी कानून की पकड़ से बाहर माना जाता है.
मुंबई ने फिर से कमबैक किया. वही फुल स्पीड, वही unbreakable spirit. लेकिन 12 मार्च 1993 की ख़ौफ़नाक यादें आज भी लोगों के दिल में जिंदा हैं. ये दिन याद दिलाता है कि नफ़रत का फ़ायर कितनी मासूम ज़िंदगियों को सेकेंड्स में राख कर सकता है.
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