Just imagine आपको जज बनना है. ये ड्रीम देखने के बाद ही पहला स्टेप हो जाता है. लॉ का entrance एग्ज़ाम क्रैक किसी यूनिवर्सिटी में एडमिशन लेना.
इसी के बाद डिग्री हासिल करना. लेकिन, सोचिए कि कोई शख्स बिना proper डिग्री के कैसे वकील ही नहीं बल्कि जज बन सकता है.
ऐसा अजूबा पाकिस्तान में हुआ है. इस्लामाबाद हाई कोर्ट ने खुद ही reveal कर दिया कि उनके एक जज के पास शुरुआत से valid law degree थी ही नहीं. मतलब वो courtroom में बैठे थे, फैसले दे रहे थे और degree legit ही नहीं थी.
पाकिस्तानी मीडिया dawn की रिपोर्ट के मुताबिक, इस्लामाबाद हाईकोर्ट ने एक 116 पेज का जजमेंट दिया है. इसमें बताया गया है कि उन्होंने जस्टिस तारिक महमूद जहांगीरी को क्यों हटाया गया है.
कोर्ट ने साफ कहा कि उनकी appointment without lawful authority के थी, क्योंकि उनके पास valid llb degree है ही नहीं.
डॉन की रिपोर्ट के मुताबिक, चीफ जस्टिस सरदार मोहम्मद सरफराज डोगर की बेंच ने उनकी llb degree को “void ab initio” बताया. यानी कोर्ट ने कहा कि उनकी डिग्री शुरुआत से ही legally invalid है.
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क्या है पूरा मामला
ये पूरा मामला जज की डिग्री को लेकर है. जहांगीरी पहली बार llb part-1 एग्ज़ाम के लिए साल 1988 में बैठे थे. वो इस एग्ज़ाम में एक फेक enrolment number के साथ बैठे थे और पकड़े गए थे.
इसके बाद 1989 में university ने circular जारी करके उन्हें 3 साल के लिए एग्ज़ाम से officially ban कर दिया था. इसी के बाद एक बार फिर 1990 में बैन होने के बाद भी जहांगीरी किसी और enrolment की मदद से llb part-2 एग्ज़ाम के लिए appear हुए.
बेंच ने साफ कहा कि university किसी भी programme के लिए सिर्फ एक ही enrolment number देती है. सेम डिग्री के लिए दो अलग-अलग numbers मिलना literally impossible है.
यही repeated discrepancies. एक तरफ double enrolment number और बाकी mismatches. इतने major थे कि court ने mark sheets और degree दोनों को अब invalid declare कर दिया है.
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इमरान खान मामले में हुए थे highlight
इससे पहले जहांगीरी साल 2023 में highlight हुए थे. जब उन्होंने देश के former पीएम इमरान खान के लिए protective order issue किया था.
इस ऑर्डर ने authorities को इमरान खान को proper legal procedure के बिना अरेस्ट करने से रोक दिया था.
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