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अफगानिस्तान में तालिबान को पावर मिलने के बाद से महिलाओं का freedom restrict हुआ है. पिछले 5 साल में ऐसे कानून बने हैं जिनमें उन्हें घर से निकलने से लेकर जॉब करने और एजुकेशन हासिल करने तक से रोक दिया गया.

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women are equal, women rights are important... जहां एक तरफ हम लगातार महिलाओं के राइट्स की बात करते हैं. वहीं, दूसरी तरफ अफगानिस्तान में एक अलग ही picture दिखाई दे रही है. अफगानिस्तान में violence against woman को legalize कर दिया गया है. अब अफगानिस्तान के कानून के तहत males को ये राइट दे दिया गया है कि वो अपनी wife के साथ physical violence कर सकते हैं. लेकिन, कंडीशन ये है कि उनकी हड्डी न टूटे....

अफगानिस्तान में ईयर बाय ईयर woman फ्रीडम shrink होता जा रहा है. साल 2021 में तालिबान ने अफगानिस्तान में पावर हासिल की. इसी के बाद लगातार महिलाओं के लेकर ऐसे कानून बनाए गए हैं जिन्होंने सीधे उनके फ्रीडम को restrict कर दिया है. अफगानिस्तान में साल 2021 में तालिबानी सरकार बनी. इसके सुप्रीम लीडर hibatullah akhundzada हैं. कंट्री में women और girls के basic rights, जैसे पढ़ाई, नौकरी, freely बाहर जाना और public life में हिस्सा लेना, सब एक challenge बन गया है. सब पर रोक लगा दी गई है.


एजुकेशन

एजुकेशन एक basic right है. लेकिन, ये भी restrict कर दिया गया है. लड़कियों को secondary schools और यूनिवर्सिटी जाने से restrict कर दिया गया है. इसी के चलते अब देश में 6 क्लास के बाद लड़कियां एजुकेशन सिस्टम से दूर हो जाती हैं.

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no freedom to स्टेप आउट

अफगानिस्तान में महिलाओं को अकेले घर से निकलने की भी permission नहीं है. अगर उन्हें घर से बाहर निकलना है तो किसी male relative के साथ निकलना होगा. आमतौर पर वो सिर्फ बहुत urgent situation पर ही घर से बाहर जा सकती हैं और बाहर निकलते समय उन्हें पूरा veil पहनना होता है. अगर कोई महिला dress code को फॉलो नहीं करती है तो उसके male relatives को भी सज़ा या जेल का सामना करना पड़ सकता है.

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Photograph: (pexels)

restrictions on वर्क

अफगानिस्तान में महिलाओं से जॉब करने की permission छीन ली गई है. तालिबान के नए नियमों के तहत अफगानिस्तान में महिलाओं को ज्यादातर नौकरियों और public places, जैसे पार्क, जिम और स्पोर्ट्स क्लब में जाने से रोक दिया गया है.

सरकारी नौकरियां (civil services), ngos और beauty salons जैसे कई सेक्टर, जहां पहले महिलाएं काम करती थीं, अब restrict और limited हो गया है. इससे workforce में महिलाओं का participation बहुत कम हो गया है.

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हेल्थकेयर में मुश्किल

महिलाओं के लिए इलाज कराना भी अब challenging बन गया है. बाहर आने-जाने पर पाबंदियां और कुछ जगहों पर male doctors से इलाज पर रोक है. इन सबके बीच female health workers की भी कमी है. इससे महिलाओं की मुश्किल बढ़ती जा रही है.

आवाज़ पर भी restriction

taliban ने “vice and virtue” वाले रूल भी बनाए. नए guidelines के मुताबिक अफगानिस्तान में women को public में पूरी तरह body और अपना फेस कवर करना mandatory है. rules कहते हैं कि महिलाओं की आवाज़ भी public में नहीं सुनाई देनी चाहिए. मतलब न बाहर बोल सकती हैं, न गा सकती हैं, न जोर से पढ़ सकती हैं.

अगर कोई इन rules को follow नहीं करता, तो detention और punishment हो सकती है. साथ ही तालिबान ने adultery के मामलों में public flogging और stoning जैसी सज़ाओं को फिर से लागू करने का ऐलान किया था.

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Photograph: (pexels)

maternal mortality rate हाई

अफगानिस्तान में infant और maternal mortality rate दुनिया में सबसे ज्यादा में से एक है. un के estimates के मुताबिक, हर 2 घंटे में एक अफगान महिला की pregnancy या childbirth में डेथ हो जाती है.

इन मौतों के पीछे कई reasons हैं. कम उम्र में pregnancy, proper nutrition की कमी (vitamin deficiency) और pregnancy के दौरान सही medical care न मिल पाना. इस बीच साल 2023 में तालिबान ने contraception की sale पर ban लगा दिया. जोकि उनकी हेल्थ के लिए और भी रिस्की है.

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शाइना परवीन अंसारी उत्तराखंड के अल्मोड़ा से हैं. लेकिन बचपन से दिल्ली में ही रहीं. pg तक की पढ़ाई दिल्ली के जामिया मिल्लिया इस्लामिया में हुई. शाइना को journalism में काम करते हुए 3 साल हो चुके हैं. जामिया से ही मास मीडिया करने के दौरान ही इंटरनशिप और यूट्यूब चैनल में काम किया. जहां एंकरिंग , रिपोर्टिंग, वॉइस ओवर सीखा. उसके बाद पीजी डिप्लोमा इन हिंदी जर्नलिज्म के दौरान कुछ समय भारत 24 के संग गुजारा. जिसके बाद the quint डिजिटल मीडिया के संग काम करने का मौका मिला. फिर न्यूज़ 18 के साथ जुड़ गई. जिसके बाद टीवी9 के साथ बतौर सब एडिटर काम किया. फिलहाल, zingabaad के साथ vibe match हो गई है.