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क्या ये कोई magical medicine है या deadly show-off? ऐश्वर्या मोहनराज के खुलासे से लेकर डॉ. अनेजा की चेतावनी तक, जानिए कैसे पतले होने की ये सनक टाइप-2 डायबिटीज के मरीजों की जान जोखिम में डाल रही है. क्या आपका ग्लो-अप वाकई वर्थ है?

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लेट्स बी रियल and let’s just address the elephant in the room.

हम चाहे जितनी भी बॉडी पॉजिटिविटी की रीलें देख लें, पर ये बात छिपी तो नहीं है कि आज भी हम स्किनी बॉडी को ही आइडियल मानते हैं और लिटरली उसकी पूजा करते हैं.

सोसाइटी में एक unsaid rule है कि अगर आप पतले हो, तो आप aesthetic हो. वही कपड़े जो एक स्किनी इंसान पर फैशनेबल लगते हैं, थोड़े भी कर्वी या प्लस-साइज़ इंसान पर weird मान लिए जाते हैं.

guys! हम एक ऐसी दुनिया में बड़े हुए हैं जहां बार्बी होती ही ज़ीरो साइज़ की है और मॉडल्स का स्टैंडर्ड भी वही है. भले ही आज प्लस-साइज़ मॉडल्स दिखती हों, but if you know you know......

flea मार्केट के कपड़ों से लेकर सोशल गैदरिंग्स के कमेंट्स तक, सब यही इशारा करते हैं कि जगह सिर्फ पतले लोगों के लिए है. इसी दबाव का नतीजा है कि ozempic, mounjaro और wegovy जैसी दवाएं.

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Photograph: (ai generated)

सोचो, एक ऐसी दवा जो टाइप-2 डायबिटीज और serious मेटाबॉलिक बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए एक लाइफ-सेविंग टूल बनकर आई थी, वो अचानक रेड कार्पेट और वायरल इंस्टा ट्रांज़िशन का सबसे बड़ा ब्यूटी हैक बन गई.

ozempic, mounjaro और wegovy आज हर जगह ट्रेंड कर रहे हैं, लेकिन इसलिए नहीं कि हमें अचानक से बायो-केमिस्ट्री में इंटरेस्ट आ गया है, बल्कि इसलिए क्योंकि दुनिया इन्हें स्किनी होने का अल्टीमेट चीट कोड मान बैठी है. but the problem is जब हम एक serious इलाज को महज एक दिखावे की चीज़ यानी aesthetic accessory की तरह इस्तेमाल करते हैं, तो हम health और show-off के बीच की लाइन को धुंधला कर देते हैं.

it’s biology, not just biryani

स्टैंड-अप कॉमेडियन ऐश्वर्या मोहनराज ने जब अपनी 22kg की वेट-लॉस जर्नी रिवील की, तो उन्होंने उस सोच को आईना दिखाया जो आलस को वज़न बढ़ने का रीज़न मानती है. 

pcod, थायरॉयड और इंसुलिन रेजिस्टेंस वजह से जब उनका वजन 51kg से 74kg पहुंचा, तो खुद को कहा- 'i was spreading like ginger'.

उन्होंने honestly माना कि जब डाइट और वर्कआउट फेल हो गए, तब उन्होंने mounjaro का सहारा लिया. ये दवा उनके लिए सिर्फ वज़न घटाने का जरिया नहीं थी, बल्कि उस 'फूड नॉइज़' को म्यूट करने का तरीका थी जो उन्हें 24/7 खाने के बारे में सोचने पर मजबूर करता था. ऐश्वर्या की कहानी साबित करती है कि जब बॉडी का 'सिग्नल सिस्टम' बिगड़ जाए, तो मेडिकल हेल्प लेना कोई गुनाह नहीं है.

the dark side of the glow-up

ozempic और mounjaro जैसे ड्रग्स के पीछे एक अनकहा मनोवैज्ञानिक पहलू भी है जिसे 'एनेडोनिया' कहते हैं. कई यूज़र्स बताते हैं कि वजन तो गिर गया, लेकिन लाइफ़ की खुशियां जैसे म्यूज़िक या दोस्तों के साथ गपशप थोड़ी फीकी लगने लगी हैं.

ऐश्वर्या ने इस ग्लो-अप के पीछे के डार्क और टॉक्सिक सच को ज़रा भी sugarcoat नहीं किया. उन्होंने सीधा-सीधा बताया कि इस जर्नी में उन्हें हर हफ्ते 4,000 रुपये के महंगे इंजेक्शन का बजट बोझ उठाना पड़ा, जो लिटरली जेब पर बहुत भारी है.

इसके साथ ही, उन्होंने उन भयंकर फिजिकल साइड इफेक्ट्स को भी unfiltered रखा जिन्हें सोशल मीडिया के aesthetic ट्रांज़िशन वीडियो अक्सर छुपा लेते हैं, जैसे कि हर वक्त रहने वाली तेज़ nausea और बहुत गंदा हेयर लॉस.

ये कोई छोटा-मोटा beauty hack या सिंपल मेकओवर नहीं है, ये एक सीरियस मेंटल और फिजिकल रिसेट है जिसे बिना सोचे-समझे ट्राई करना बहुत बड़ा red flag है

dr. pankaj aneja (the og of diabetes & metabolism)- 

हमने डॉ. पंकज अनेजा से बात की, जिनके पास 43 से ज़्यादा सालों का तगड़ा एक्सपीरियंस है. हमने उनसे वो सारे uncomfortable सवाल पूछे जो आजकल सोशल मीडिया पर ट्रेंड कर रहे हैं. 

ques: क्या लोग इसे बस snatched दिखने के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं? क्या मोटापा वाकई इतना deep issue है?

ans: डॉ. अनेजा ने साफ़ कर दिया कि मोटापा कोई पर्सनल फेलियर या लाइफस्टाइल का skill issue नहीं है. who के हिसाब से, ये एक लंबी बीमारी है. ये दवाएं सिर्फ दिखावे के लिए नहीं हैं, बल्कि ये आपके metabolism को अंदर से ठीक करती हैं और आपके दिल और kidneys के लिए एक सुरक्षा कवच की तरह काम करती हैं.

ques: क्या ये one-time fix है? क्या इंजेक्शन रुकते ही सब पहले जैसा messy हो जाएगा?

ans: रियल टॉक, जैसे ही आप दवा बंद करते हैं, आपके शरीर का set point यानी की पुराना वजन फिर से एक्टिव हो जाता है. 6 से 12 महीने में वजन वापस आ सकता है क्योंकि दिमाग के भूख वाले सिग्नल्स फिर से main character बन जाते हैं. ये कोई शॉर्टकट नहीं, बल्कि एक लंबी कमिटमेंट है.

ques: क्या इससे मेरे gains खत्म हो जाएंगे? क्या ये मसल्स का नुकसान करती है?

ans: दवा यहां विलेन नहीं है. मसल्स लॉस तब होता है जब लोग खाना कम कर देते हैं और protein पर ध्यान नहीं देते. अगर आप अपने प्रोटीन macros हिट कर रहे हैं और वर्कआउट कर रहे हैं, तो आपकी मसल्स की स्ट्रेंथ पहले से बेहतर भी हो सकती है.

ques: क्या ये दवाएं life से happiness छीन लेती हैं? क्या खाना vibey नहीं रहता?

ans: ये खुशी का नुकसान नहीं है. असल में, बहुत से लोग तनाव में खाते हैं (emotional eating). ये दवा बस उस दिमागी शोर या food noise को mute कर देती है. ये आपकी खुशी नहीं छीनती, बस आपको खाने के लिए impulsive होने से बचाती है. 

ques: 'ozempic hair loss' का क्या सीन है? क्या ये कोई केमिकल रिएक्शन है?

ans: ये दवा का रिएक्शन नहीं, बल्कि math है. जब वजन बहुत तेज़ी से गिरता है और शरीर को sufficient protein या iron नहीं मिलता, तो वो survival mode में चला जाता है और बालों की ग्रोथ रोक देता है. अगर न्यूट्रिशन सही रखा जाए, तो बाल वापस slay करने लगते हैं. what do they say??? hair is hairing!!!!!

रिस्क अलर्ट

ques: अगर बजट कम हो जाए और मैं अचानक दवा छोड़ दूं, तो क्या होगा?
ans: बिना डॉक्टर की सलाह के दवा छोड़ना एक bad move है. आपका शरीर वापस अपने पुराने default mode पर चला जाता है. भूख तेज़ी से बढ़ती है और खोया हुआ वजन अक्सर stubborn fat के रूप में वापस आता है, जो आपकी पूरी प्रोग्रेस को बर्बाद कर सकता है.

डॉ. पंकज अनेजा का मैसेज एकदम लाउड और क्लियर है. glp-1 दवाएं एक metabolic game-changer हैं, लेकिन इन्हें सिर्फ दिखावे के लिए नहीं, बल्कि हेल्थ सुधारने के लिए इस्तेमाल करें.

सोहा अली खान और स्किनी obsession का रियलिटी चेक

ऐश्वर्या के खुलासे के बाद जहां कुछ लोगों ने उन्हें ट्रोल किया, वहीं सोहा अली खान जैसी सेलिब्रिटीज उनके सपोर्ट में आईं. सोहा ने ऐश्वर्या की honesty की तारीफ करते हुए एक बहुत ज़रूरी बात तारीफ करते हुए कहा, 'फाइनली किसी ने सच बोला'.

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ozempic और mounjaro कोई मामूली ट्रेंड नहीं हैं. सोहा ने इस बात पर ज़ोर दिया कि वेट लॉस हमेशा विलपावर का game नहीं होता. इसमें हार्मोन्स, मेटाबॉलिज्म और pcos जैसे कॉम्प्लेक्स फैक्टर्स शामिल होते हैं.

सोहा का मैसेज लाउड एंड क्लियर था ये इंजेक्शंस कोई वेट-लॉस ट्रेंड नहीं हैं. ये सीरियस मेडिकल ट्रीटमेंट्स हैं जिनके साइड इफेक्ट्स होते हैं और जिन्हें कड़े मेडिकल सुपरविजन की ज़रूरत होती है.

अपनी बॉडी को कोई सोशल मीडिया ट्रेंड मत समझो जिसे हर हफ्ते अपडेट किया जाए. जैसा कि सोहा ने कहा बजाय इसके कि हम ये पूछें कि 'कौन इसे ले रहा है', हमें खुद से पूछना चाहिए कि 'किसे इसकी वाकई ज़रूरत है?' अगर पतला होने की कीमत आपकी मेंटल पीस है, तो ये loss है, win नहीं. असली फ्लेक्स ज़ीरो साइज़ में नहीं, बल्कि अपनी हेल्थ को टॉप प्रायोरिटी रखने में है.

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the ethical crisis

पर रुको, इस पूरी skinny era वाली रेस में हम एक बहुत बड़ा ethical glitch भूल रहे हैं. ozempic और mounjaro का ये aesthetic hack सिर्फ़ हमारी बॉडी या बैंक बैलेंस तक limited नहीं है, ये एक major global shortage का कारण बन गया है.

जब कोई फिट इंसान सिर्फ़ एक pinterest-perfect वेकेशन बॉडी के लिए ये इंजेक्शंस लेता है, तो वो लिटरली उस type-2 diabetic पेशेंट का हिस्सा छीन रहा है जिसे इसकी जान बचाने के लिए ज़रूरत है.

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सोचो, एक तरफ वो इंसान है जिसके लिए ये दवा survival है, और दूसरी तरफ कोई इन्फ्लुएंसर है जिसे बस अपनी transformation reel के लिए 5 किलो कम करना था. जब हम एक लाइफ-सेविंग मेडिसिन को luxury accessory. बना देते हैं, तो हम अपनी वैनिटी को किसी की जान से ऊपर रख रहे होते हैं.

it’s giving… selfishness. असली flex ज़ीरो साइज़ में नहीं है, बल्कि इस बात को समझने में है कि दवाइयां trends के लिए नहीं, treatments के लिए होती हैं.

don’t be that person who trades someone else’s health for a snatched selfie.

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shivani doesn’t seek a title to fill a room. she is a quiet observer trying to understand the world. She wishes to be like rain falling on the sea, a quiet addition to a vast mystery. believing the best stories live between facts and feelings rather than in headlines, she writes about the invisible ways the world softens or breaks us. she isn't an expert at a finish line, but a traveler on the road, writing with a heart wide open to questions even when answers are few.