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आज ai को लेकर माहौल पूरा split है. कुछ लोग इसे future का hero मान रहे हैं तो कुछ इसे humanity का biggest threat मान रहे हैं. इसी confusion के बीच अमेरिकन फिल्ममेकर steven spielberg का एक statement सामने आया, जिसमें वो हमें रुककर सोचने को मजबूर करते हैं.

Steven Spielberg on ai

ai आज जितना powerful होता जा रहा है, उतना ही डर भी बढ़ता जा रहा है कि कहीं ये इंसान को ही पीछे न छोड़ दे. क्या मशीनें हमारी जॉब, हमारी creativity और हमारी पहचान तक छीन लेंगी? इसी सवाल पर अमेरिकन फ़िल्ममेकर steven spielberg ने खुलकर बात की और एक ऐसी चेतावनी दी, जिसे नज़रअंदाज़ करना आसान नहीं है.

उनका मानना है कि टेक्नोलॉजी की रेस में humanity को पीछे नहीं छोड़ना चाहिए. spielberg recently 'the late show with stephen colbert' में नज़र आए. यहां colbert ने मज़ाकिया अंदाज़ में सवाल पूछे, लेकिन इनके answers काफी सीरियस थे. spielberg ने कहा कि ai बनाने वाले लोग सिर्फ “टॉप पर पहुंचने” की सोच रहे हैं, ये नहीं देख रहे कि इसका असर दुनिया पर क्या होगा.

हम आमतौर पर ai की morality यानी नैतिकता पर ज्यादा बात नहीं करते. न ही इस पर कि इसे चलाने के लिए कितने बड़े-बड़े data centers, बिजली और resources खर्च हो रहे हैं, लेकिन ये सब बातें सिर्फ फ़िल्मों तक नहीं हैं, ये हमारी असली दुनिया को डायरेक्टली affect कर रही हैं.

spielberg ने साफ कहा कि जो लोग ai की रेस में सबसे आगे हैं, उनका फोकस सिर्फ “टॉप पर पहुंचने” पर है न कि इस पर कि इसके नतीजे क्या होंगे. उनके मुताबिक, ये अब morality का सवाल नहीं रह गया है, बल्कि ego और competition का गेम बन चुका है.

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25 साल पहले बनाई थी ai पर फ़िल्म

उन्होंने अपनी ही फ़िल्म jurassic park का एक फेमस philosophical dialogue याद दिलाया 'they were so busy thinking about whether they could do it, that they didn’t stop to think if they should.' यानी हम बस ये सोच रहे हैं कि कुछ बना सकते हैं या नहीं, लेकिन ये नहीं सोच रहे कि क्या हमें वो बनाना भी चाहिए और आज के ai दौर में ये लाइन पहले से कहीं ज्यादा relevant लगती है.

सबसे interesting ये है कि spielberg ने ai पर फ़िल्म बनाई थी. आज से करीब 25 साल पहले, 2001 में a.i. artificial intelligence और अब जो कुछ आज हो रहा है, वो उस फ़िल्म की कहानी से काफी हद तक मिलता-जुलता लगने लगा है.

Steven Spielberg ai
Photograph: (freepik)

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फ़िल्म में future के advanced machines यानी “super mecha” अपने human creators को extinct gods की तरह याद करते हैं. इंसान खत्म हो चुके होते हैं, लेकिन उनकी बनाई चीजें आगे बढ़ चुकी होती हैं.

ये एक powerful idea है, इंसान लगातार evolve करता है, लेकिन एक वक्त ऐसा भी आ सकता है, जब हमारी creations ही हमें पीछे छोड़ दें और हम सिर्फ history बनकर रह जाएं.

spielberg ने फ़िल्म के सबसे अहम किरदार david का भी जिक्र किया, जिसे haley joel osment ने निभाया था. david पहला ऐसा robot बच्चा था, जिसमें real feelings थीं. future की मशीनें उसी इंसानी touch को सबसे ज्यादा कीमती मानती हैं, क्योंकि इंसान तब तक दुनिया से गायब हो चुका होता है.

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content generate कर सकती हैं मशीनें

spielberg का कहना है कि मशीनें content generate कर सकती हैं, लेकिन वो कभी human experience, दर्द, प्यार और यादों से निकली कहानियों की बराबरी नहीं कर सकतीं.

उनके लिए इंसानी soul कुछ ऐसा है जो “unimaginable” और “ineffable” है. यानी जिसे शब्दों या code में बांधा ही नहीं जा सकता. और यही वो point है जहां ज्यादातर artists उनसे agree करते हैं.

stories, visuals और emotions से connect करने के लिए हमारे अंदर कुछ होना जरूरी है कुछ ऐसा जो machines के पास नहीं है. ai patterns सीख सकता है, लेकिन एहसास नहीं.

spielberg ये भी मानते हैं कि उन्हें ये सोचकर डर लगता है कि कहीं future में किताबें, फ़िल्में और म्यूजिक मशीनें ही न बनाने लगें. उनके हिसाब से अगर creativity भी machines के हाथ में चली गई तो हम इंसान होने का मतलब ही खो देंगे और फिर जिंदा होने की अहमियत क्या रह जाएगी?

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सहरीन ने 10+2 तक आर्ट्स साइड से पढ़ाई की. शुरुआत से ख़बरें देखना और पढ़ना पसंद था. वक्त के साथ यह पसंद और बढ़ी तो ग्रेजुएशन भी इसी फील्ड में (बैचलर्स जर्नलिजम एंड मास कम्युनिकेशन) किया. मीडिया को और अच्छे से जानने और समझने और खुद को इसी फील्ड के लिए तैयार करने के लिए जामिया मिल्लिया इस्लामिया से PG Diplom in TV Journalism किया. इसी दौरान एबीपी न्यूज़ में मौका मिला तो वहां काम शुरू किया. इसी सफर को जारी रखते हुए TV9 भारतवर्ष में 2 साल बतौर sub-editor 2 साल हिंदी वेबसाइट पर काम किया. zingabad में सहरीन अपने मन की लिखने-पढ़ने और एक्सप्लोर करने के सपने को पूरा कर रही हैं.