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हर बार नया आउटफिट? सो 2010s! gen-z ने रूल्स बदल दिए हैं और अब आउटफ़िट रिपीटिंग ही स्मार्ट फ़्लेक्स है. क्या आप भी पुराने फ़ैशन ट्रैप में फंसे हैं या आपने थ्रिफ्टिंग का गॉड टियर लेवल अनलॉक कर लिया है? चलिए अपनी अलमारी का ग्लो अप करने के लिए तैयार हो जाइए..

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आजकल का फैशन केवल 'ootd' पोस्ट करने तक ही लिमिटेड नहीं है, ये एक पूरी वाइब है. gen z ने पुराने बोरिंग फ़ैशन रूल्स को कैंसिल कर दिया है. अब हर पार्टी के लिए नया कपड़ा खरीदना क्रिंज माना जाता है.

असली फ्लेक्स तो इसमें है कि आप अपने पुराने कपड़ों को कितनी कूल तरह से स्टाइल करते हैं. 'आउटफिट रिपीटिंग' और 'थ्रिफ्टिंग' अब मजबूरी नहीं, बल्कि जबरदस्त मेन करैक्टर एनर्जी है. चलिए जानते हैं कैसे...

नो कैप, ये है असली स्टाइल

पहले लोग सोचते थे कि एक ही ड्रेस दोबारा पहनी तो "लोग क्या कहेंगे?" लेकिन gen-z का जवाब है "आई डोंट केयर!" एक ही हुडी या जींस को अलग-अलग एक्सेसरीज के साथ पहनना अब स्मार्ट फ्लेक्स है.

इसे हम 'सस्टेनेबिलिटी' कहते हैं, लेकिन ईज़ी लैंग्वेज में ये धरती के लिए हमारा प्यार है. जब आप अपने कपड़ों को 'रिपीट' करते हैं, तो आप फ़ास्ट-फ़ैशन के जाल को तोड़ रहे होते हैं.

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visual representation Photograph: (ai generated)

एक ही टॉप को 5 तरह से पहनना आपकी क्रिएटिविटी दिखाता है. तो अगली बार जब कोई कहे "ये तो कल भी पहना था," तो बस मुस्कुराइए और कहिए "इट्स कॉल्ड स्लो फ़ैशन, बेस्टी!"

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'यूनिक' दिखने का असली हैक

मॉल के कपड़े? मिड. थ्रिफ्टेड कपड़े? गॉड टियर! आजकल थ्रिफ्टिंग का क्रेज आसमान छू रहा है. थ्रिफ्ट स्टोर से पुराने विंटेज जैकेट या '90s की बैगी जींस ढूंढना एक एडवेंचर जैसा है.

इसका सबसे बड़ा फायदा ये है कि जो आपने पहना है, वो किसी और के पास नहीं होगा. थ्रिफ्टिंग न केवल आपकी जेब को 'ब्रोक' होने से बचाती है, बल्कि आपको भीड़ से अलग खड़ा करती है.

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ये कचरा कम करने और पुराने कपड़ों को 'ग्लो-अप' देने का सबसे कूल तरीका है. पुराने कपड़ों में वो 'रेट्रो' वाइब होती है जो किसी नए ब्रांडेड शोरूम में नहीं मिल सकती.

'एस्थेटिक' भी और 'एथिकल' भी

फास्ट-फ़ैशन ब्रांड्स जो धरती को नुकसान पहुंचाते हैं, उन्हें gen-z घोस्ट कर रहा है. अब नो-गिल्ट फैशन का ज़माना है. इसका मतलब है ऐसे कपड़े पहनना जिन्हें पहनकर आत्मा को शांति मिले, बोझ नहीं.

जब आप प्री-लव्ड कपड़े खरीदते हैं या सस्टेनेबल ब्रांड्स को सपोर्ट करते हैं, तो आप केवल अच्छे दिखते नहीं हैं, आप अच्छा फील भी करते हैं.

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ये फ़ैशन के लिए एक एक्टिव सोच है. बिना किसी पछतावे के कपड़े पहनना और एनवायरमेंट की चिंता करना ही असली एस्थेटिक है. हम केवल ट्रेंड्स के पीछे नहीं भाग रहे, हम खुद अपना ट्रेंड बना रहे हैं जो धरती के लिए भी सेफ़ है.

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तो मोरल ऑफ़ द स्टोरी ये है कि faishan का मतलब अब फ़ास्ट होना नहीं, बल्कि वोक होना है. आउटफ़िट रिपीट करना कूल है, थ्रिफ्टिंग करना समझदारी है, और बिना गिल्ट के स्टाइल करना सबसे बड़ी विक्ट्री है. अब दिखावे की नहीं, टिकाऊपन की बारी है. सो स्टे आइकॉनिक, स्टेआइकॉनिक!

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Riddhi Jha profile imageRiddhi Jha
ridhi jha is a dynamic content creator and writer with a strong passion for storytelling across digital and media platforms. a journalism graduate from dbs global university, she blends academic knowledge with hands-on industry experience. ridhi previously worked as a producer for the indian tv show khabro ka thermometer, where she gained valuable insight into media production and audience engagement.