आजकल पेट पेरेंट बनना सिर्फ एस्थेटिक फोटोज और क्यूट रील डालने तक लिमिटेड नहीं है. अगर आप अपने पेट को अपनी जान मानते हैं, तो उनकी प्रॉपर केयर करना आपका मेन टास्क होना चाहिए. लोग अक्सर सोचते हैं कि ग्रूमिंग सिर्फ उन्हें "सुंदर" दिखाने के लिए है, लेकिन असली बात तो ये है कि ये उनके लिए एक बेसिक नेसेसिटी है. ग्रूमिंग कोई फैंसी चोंचला नहीं, बल्कि एक रिस्पॉन्सिबिलिटी है जिससे आपका पेट हेल्दी, कॉम्फी और क्लीन रहता है. वेट्स का भी यही मानना है कि ग्रूमिंग असल में एक प्रिवेंटिव हेल्थ चेक है. जब आप अपने पेट को ब्रश करते हैं या नहलाते हैं, तो आप उनकी स्किन, फर या बिहेवियर में हो रहे छोटे-छोटे 'रेड फ्लैग्स' को जल्दी पकड़ लेते हैं. चाहे वो आउटडोर डॉग्स हों जिन्हें ज्यादा क्लीनिंग चाहिए, या फिर इंडोर कैट्स जो अपनी 'सेल्फ-केयर क्वीन' वाइब में रहती हैं.
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हर किसी की नीड्स अलग होती हैं. अगर आप इसे शांति से और कंसिस्टेंसी के साथ करते हैं, तो ग्रूमिंग कोई स्ट्रेसफुल काम नहीं बल्कि एक तगड़ा बॉन्डिंग टाइम बन जाता है. इट्स अ टोटल विन-विन सिचुएशन.
डेली केयर
जब बात आती है डेली मेंटेनेंस की, तो 'ब्रशिंग' ग्रूमिंग का बेस है और ये पूरी तरह उनके टाइप पर डिपेंड करता है. अगर आपका पेट शॉर्ट-हेयर वाला है, तो वीकली ब्रशिंग से काम चल जाएगा, लेकिन अगर वो लॉन्ग-हेयर वाले क्यूटीज हैं, तो भाई, उन्हें डेली अटेंशन चाहिए वरना पेनफुल मैटिंग (बालों की गांठें) उनका मूड खराब कर सकती हैं. हमेशा राइट टूल्स का इस्तेमाल करें क्योंकि गलत ब्रश उनकी स्किन को इरिटेट कर सकते हैं, जो कि बिल्कुल भी कूल नहीं है. अब बात करते हैं बाथिंग की तो इसे तभी शेड्यूल करें जब जेन्युइनली जरूरत हो, क्योंकि ओवर-बाथिंग से उनके नेचुरल ऑयल्स का 'द एंड' हो जाता है. अरे हां, ह्यूमन प्रोडक्ट्स आर अ बिग नो-नो.
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हमेशा पेट-फ्रेंडली शैम्पू ही चुनें. नेल ट्रिमिंग को स्किप करना सबसे बड़ी गलती है. लंबे नाखून उन्हें वॉक करते समय काफी डिस्कंफर्ट देते हैं. 'लिटिल-लिटिल ट्रिम्स' रेगुलरली करना ही स्मार्ट मूव है. वॉक के बाद उनके पॉज (पंजों) को चेक करना मत भूलना, क्योंकि वहां छिपी गंदगी या कट्स को आप इजीली स्पॉट कर सकते हैं. अगर ये सब बचपन से ही 'ट्रीट्स और तारीफ' के साथ शुरू किया जाए, तो आपके पेट्स इसे एक चिल वाइब की तरह लेते हैं. एक पेट पेरेंट के तौर पर रेखा अपनी जिम्मेदारी और खर्चों के बारे में बताती हैं उनका कहना है नाखून कटवाने का खर्च 250 रुपये तक आता है, बाकी वैक्सीनेशन और डीवॉर्मिंग का खर्चा मिलाकर लगभग 10,000 रुपये तक जाता है. इसके अलावा, डॉग का खाना (12 किलो) 7,000 रुपये का आता है जो महीने भर भी नहीं टिकता.
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हेल्थ चेक्स, हाइजीन
ग्रूमिंग सिर्फ सफाई नहीं, बल्कि एक 'मिनी बॉडी स्कैन' है. कानों में कोई रेडनेस या 'वियर्ड स्मेल' दिखे तो समझ जाओ कि कुछ ऑफ है. आखों के आसपास की हल्की क्लीनिंग उन्हें इरिटेशन से बचाती है, खासकर उन ब्रीड्स को जिनका चेहरा थोड़ा फ्लैट होता है. एक और चीज जिसे लोग अक्सर कैजुअली स्किप कर देते हैं, वो है 'डेंटल केयर'. सच तो ये है कि पेट्स में डेंटल इश्यूज सबसे कॉमन प्रॉब्लम्स में से एक हैं.
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हफ्ते में कुछ बार ब्रश करना या डेंटल च्युज देना उनकी ओरल हेल्थ के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकता है. कुछ पेट्स और ब्रीड्स को प्रोफेशनल ग्रूमिंग की जरूरत होती है जैसे हेयर क्लिपिंग या कोई स्पेशल केयर जिसके लिए एक्सपर्ट्स के पास जाना ही बेस्ट है. अगर ग्रूमिंग के टाइम आपका पेट बहुत ज्यादा डर रहा हो, अग्रेसिव हो जाए या उसे पेन हो रहा हो, तो खुद साइंटिस्ट मत बनो और सीधे किसी प्रो ग्रूमर या वेट के पास जाओ. बॉटम लाइन यही है कि ग्रूमिंग कोई लग्जरी नहीं, बल्कि उनके डेली रूटीन का हिस्सा है. आपके पेट्स कंसिस्टेंट केयर डिजर्व करते हैं, न कि सिर्फ कभी-कभार वाला अटेंशन.
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