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आज के टाइम पर आपने एक word ज़रूर सुना होगा 'pan india film' क्या आप जानते हैं कि इसका क्या मतलब है. यानी वह फिल्म जिसने पूरे देश में कई भाषाओं में अच्छी कमाई की. चलिए आपको बताते हैं कि इस कैटेगरी की पहली फिल्म कौन सी थी?

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आज के टाइम में जब हर मूवी nationwide hype बनाने का सपना देखती है, तब एक टर्म सबसे ज़्यादा ट्रेंड में है, वो है पैन इंडिया फिल्म, लेकिन ये पैन इंडिया फिल्म होता क्या है और ये कौन सी फिल्में होती हैं तो ये सिर्फ सिनेमा नहीं, बल्कि languages, रीज़न और इंडस्ट्री की दीवारें तोड़कर पूरे देश को एक ही स्क्रीन पर जोड़ने का नाम है.

पैन इंडिया फिल्म वो होती है जो सिर्फ़ एक रीजन या लैंग्वेज तक लिमिट नहीं रहती, बल्कि पूरे देश में एक साथ कई languages में रिलीज़ हो और हर जगह हाइप क्रिएट करे. मतलब नॉर्थ, साउथ, ईस्ट, वेस्ट सब जगह एक ही मूवी का क्रेज़.

इसकी स्टोरी, एक्शन, म्यूज़िक और स्टार पावर इतनी यूनिवर्सल होती है कि language barrier मैटर ही नहीं करता. पैन इंडिया फिल्म सिर्फ मूवी नहीं, पूरा vibe होती हैं. ये वो सिनेमा है जिन्हें language select नहीं करती, audience खुद-ब-खुद select हो जाती है.

जब ट्रेलर ड्रॉप होते ही ट्विटर ट्रेंड करने लगे, insta reels सिर्फ उसी फिल्म के सीन से भर जाएं, डायलॉग मीम बन जाएं और नॉर्थ-साउथ की बहस ही खत्म हो जाए तो समझ लो पैन इंडिया मोमेंट शुरू हो चुका है.

ऐसी फिल्मों में स्टोरी बड़ी होती है, emotions universal होते हैं, एक्शन over-the-top लेकिन satisfying होता है और म्यूज़िक ऐसा कि हर playlist में घुस जाए. 

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कौन सी थी पहली पहली पैन इंडिया फिल्म?

अब सवाल ये कि पहली पैन इंडिया फिल्म कौन-सी थी और वो बॉलीवुड की थी या साउथ की? तो चलिए आपको बताते हैं.

पैन इंडिया फिल्म वाला टर्म ज़्यादा पुराना नहीं है ये असल में 'baahubali' की ज़बरदस्त सक्सेस के बाद, करीब 10 साल पहले ट्रेंड में आया. उ

सके बाद 'rrr', 'kgf' और 'pushpa' जैसी फिल्मों ने इस पैन इंडिया वेव को और ज़्यादा पावर दे दी, लेकिन फैक्ट चेक करो तो ना 'baahubali' पहली पैन इंडिया फिल्म थी, और ना ही सबसे पहली ब्लॉकबस्टर, तो फिर कौन सी फिल्म थी?

असल गेम तो आज़ादी के बस एक साल बाद ही बदल गया था. हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक 1943 में ताराचंद बड़जात्या एक फिल्म डिस्ट्रिब्यूटर थे. तब तक राजश्री प्रोडक्शंस की नींव भी नहीं पड़ी थी. बिज़नेस ग्रो करने के चक्कर में उनकी मुलाकात तमिल सिनेमा के बड़े फिल्ममेकर ss vasan से हुई, जो जेमिनी पिक्चर्स के लिए एक मेगा पीरियड ड्रामा बना रहे थे वो था chandralekha.

बड़जात्या ने वासन को convince किया कि फिल्म को तमिल के साथ-साथ हिंदी में भी बनाया जाए. हाल ही में sooraj barjatya ने बताया कि chandralekha के मेकर्स ने सिर्फ डबिंग नहीं की, बल्कि कुछ सीन दोबारा शूट भी किए ताकि लिप मूवमेंट परफेक्ट लगे.

बाद में वासन ने उनके दादा को ऑल-इंडिया डिस्ट्रिब्यूशन राइट्स दे दिए. इस तरह पहली बार किसी तमिल फिल्म को पूरे भारत में रिलीज़ मिली और वो भी फुल स्केल पर.

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दो भाषाओं में रिलीज़ हुई chandralekha

1948 में 'chandralekha' दो भाषाओं में रिलीज़ हुई और बाद में कई और भाषाओं में इसे डब किया गया. यही वजह है कि इसे असली मायनों में इंडिया की पहली पैन इंडिया फिल्म माना जाता है. सूरज बड़जात्या 'chandralekha' को अपने टाइम की 'baahubali' बताते हैं.

फिल्म का बजट 30 लाख था, जो उस दौर में बहुत बड़ी रकम थी और फिल्म ने 1.55 करोड़ का कलेक्शन कर लिया था. इसने Kismet को पीछे छोड़कर सबसे ज़्यादा कमाने वाली भारतीय फिल्म का रिकॉर्ड बना दिया था. 

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Photograph: (imdb)

दिलचस्प बात ये है कि तमिल में फिल्म की कमाई ठीक-ठाक थी, लेकिन असली पैसा हिंदी बेल्ट से आया. chandralekha की सक्सेस ने नॉर्थ इंडिया का मार्केट साउथ फिल्मों के लिए खोल दिया. ग्रैंड सेट्स, बड़ा ensemble cast और स्केल-वाली स्टोरीटेलिंग का कॉन्सेप्ट यहीं से पॉपुलर हुआ, जिसे बाद में mughal-e-ezam जैसी क्लासिक फिल्मों ने भी अपनाया.

हालांकि, कई रिपोर्ट्स में चंद्रलेखा को नहीं बल्कि, 1959 में आई कन्नड़ माइथोलॉजिकल फिल्म 'mahishasura mardini' को बताया जाता है. इस फिल्म को भी वाइडली इंडिया की पहली रियल पैन-इंडिया फिल्म माना जाता है. 

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Photograph: (imdb)

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1959 की टॉप कमाई करने वाली इंडियन फिल्म

चंद्रलेखा को जहां दो भाषाओं में रिलीज़ किया गया था. वहीं dna india की रिपोर्ट के मुताबिक 'mahishasura mardini' के हिंदी वर्ज़न को अलग नाम 'durga maata' दिया गया था.

मद्रास में शूट हुई इस फिल्म को 8 भाषाओं में रिलीज़ किया गया था और हर जगह इस फिल्म को जबरदस्त रिस्पॉन्स मिला. कन्नड़ ओरिजिनल वर्ज़न ब्लॉकबस्टर रहा और बाकी versions ने भी आराम से अपनी लागत निकाल ली.

1959 की टॉप कमाई करने वाली इंडियन फिल्मों में इसका नाम शामिल था. यानी उस टाइम भी पैन-इंडिया हाइप रियल थी. इस फिल्म में लीड रोल में सुपरस्टार राजकुमार थे

'mahishasura mardini' के बाद कई सालों तक कोई भी इंडियन फिल्म तीन से ज़्यादा भाषाओं में डब नहीं हुई. हां, कुछ फिल्में बिना डबिंग के भी पूरे इंडिया में चलीं. यानी ये तो क्लियर हो गया कि first pan india movie साउथ से ही थी.

टेक्निकली पहले भी फिल्में डब होकर पूरे इंडिया में चली थीं, लेकिन मॉडर्न पैन इंडिया ट्रेंड की शुरुआत 'baahubali: the beginning' से मानी जाती है.

इस फिल्म ने साउथ सिनेमा को ऑल-इंडिया लेवल पर मेनस्ट्रीम बना दिया और साबित कर दिया कि कंटेंट किंग है. तो साफ बात है  पैन इंडिया मूवमेंट को रियल मायनों में स्टार्ट किया साउथ इंडस्ट्री ने और उसके बाद बॉलीवुड भी इस गेम में फुल ऑन एंटर हो गया.

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सहरीन ने 10+2 तक आर्ट्स साइड से पढ़ाई की. शुरुआत से ख़बरें देखना और पढ़ना पसंद था. वक्त के साथ यह पसंद और बढ़ी तो ग्रेजुएशन भी इसी फील्ड में (बैचलर्स जर्नलिजम एंड मास कम्युनिकेशन) किया. मीडिया को और अच्छे से जानने और समझने और खुद को इसी फील्ड के लिए तैयार करने के लिए जामिया मिल्लिया इस्लामिया से PG Diplom in TV Journalism किया. इसी दौरान एबीपी न्यूज़ में मौका मिला तो वहां काम शुरू किया. इसी सफर को जारी रखते हुए TV9 भारतवर्ष में 2 साल बतौर sub-editor 2 साल हिंदी वेबसाइट पर काम किया. zingabad में सहरीन अपने मन की लिखने-पढ़ने और एक्सप्लोर करने के सपने को पूरा कर रही हैं.