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यार ब्लॉक करना अब पुराना हुआ, आज का दौर तो silent death का है. जब ब्लू टिक के बाद का सन्नाटा किसी शोर से ज्यादा शोर करने लगे और बिना क्लोजर के रिश्ते डिजिटल वेंटिलेटर पर चले जाएं. क्या आपके इनबॉक्स में भी कोई रिश्ता आखिरी सांसें ले रहा है?

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मैसेज डिलीवर्ड… ब्लू टिक… बट कोई रिप्लाई नहीं आया! आज-कल रिलेशन का एंड अब फाइट, ब्लॉक या सीधा बाय कहने से नहीं होता बल्कि वो डिजिटली होता है, चुपचाप होता है, इतना चुपचाप कि पता भी नहीं चलता. बिना किसी आर्ग्यूमेंट के, बिना लड़ाई-झगड़े के, बस डिस्टेंस मेंटेन हो जाता है. ब्लॉक करने का जमाना तो पुराना हो गया.

वो कहते हैं न कि जो मजा इग्नोर करने में है वो ब्लॉक करने में नहीं. आज की डेटिंग और फ्रेंडशिप की दुनिया में the end का तरीका बदल चुका है. जहां पहले ब्रेकअप्स में चीखना-चिल्लाना, स्टेटस पर दुख भरे गाने लगाना, अच्छा चलता हूं दुआओं में याद रखना वाइब और एक-दूसरे को ब्लॉक करके अपनी भड़ास निकालना शामिल था.

वहीं आज का दौर quiet quitting का है. जब हम किसी में इंट्रेस्टेड नहीं होते थे, तो उसे ब्लॉक कर देते थे.  लेकिन Gen-Z सोचती है कि अगर मैंने किसी को ब्लॉक किया, तो इसका मतलब है "आय स्टिल केयर".

ब्लॉक करना एक रिएक्शन है. ये दिखाता है कि सामने वाले ने आपको हर्ट किया है और आप उसे अपनी स्क्रीन पर देखना नहीं चाहते. बट गेस व्हाट, इग्नोर करना? वो है असली सैवेज मूव. ये सामने वाले को मैसेज देता है कि "तुम मेरी लाइफ में इतने भी इम्पॉर्टेंट नहीं हो कि मैं तुम्हें ब्लॉक करने की मेहनत करूं." जब आप किसी का मैसेज सीन करके छोड़ देते हैं, तो आप कंट्रोल अपने हाथ में रखते हैं. वो इंसान बार-बार चैट चेक करता है, ऑनलाइन स्टेटस देखता है, और उस खामोशी की वजह ढूंढते-ढूंढते खुद को गैसलाइट करने लगता है.

नो क्लोजर, नो ड्रामा
आजकल लोग कॉन्फ्रंटेशन पसंद नहीं करते हैं. किसी को ये बोलना कि "मुझे अब तुममें इंटरेस्ट नहीं है" या "हमारी वाइब मैच नहीं कर रही," बहुत ही बोरिंग लगता है इसलिए लोग 'Slow Fade' का रास्ता चुनते हैं. पहले दिन रिप्लाई 5 मिनट में आता था, फिर 5 घंटे हुए, फिर 5 दिन और फिर… साइलेंस…… बिना किसी लड़ाई के धीरे-धीरे अपनी प्रजेंस कम कर देना ताकि सामने वाला खुद ही समझ जाए और पीछे हट जाए. इसमें कोई क्लोजर नहीं मिलता, बस एक किस्सा रह जाता है जो कभी खत्म ही नहीं होता.

जब वो आपको 'Archive' में रखते हैं
ब्लॉक न करने का एक सच 'Breadcrumbing' भी है. कई बार लोग आपको इग्नोर तो करते हैं, लेकिन ब्लॉक नहीं करते ताकि आप पूरी तरह गायब न हो जाएं. वो आपको टाइम टू टाइम पर छोटे-छोटे 'crumbs' देते रहते हैं जैसे कि आपकी स्टोरी पर एक लाइक, या महीनों बाद एक "Hey" का मैसेज. ये आपको एक Digital Limbo में फंसाए रखता है. आप न तो आगे बढ़ पाते हैं और न ही वापस जा पाते हैं. वो आपको अपनी लाइफ की 'Backup' लिस्ट में रखते हैं. ब्लॉक करने से तो रिलेशन डेड हो जाता है, लेकिन इग्नोर करके वो आपको वेन्टिलेटर पर रखते हैं. न्यूरोसाइंस के रिसर्च  (जैसे कि Leah LeFebvre का स्टडी ) बताते हैं कि जब हमें कोई ऑनलाइन रिजेक्ट या 'इग्नोर' करता है, तो हमारे दिमाग के वही हिस्से एक्टिव होते हैं जो फिजिकली  चोट लगने पर होते हैं. यानी, 'ब्लू टिक' के बाद का सन्नाटा सिर्फ मेंटली नहीं फिजिकल पेन जैसा है. 
 
साइलेंट एग्रीमेंट और The Anxiety of the 'Blue Tick'
कभी-कभी ये गैप दोनों तरफ से होता है. इसे हम 'Soft Launch of a Breakup' कह सकते हैं. दोनों को पता है कि बात खत्म हो गई है. कोई किसी को ब्लॉक नहीं करता, दोनों एक-दूसरे की स्टोरी देखते रहते हैं, पर बातचीत का 'Last Seen' हफ्तों पुराना होता है. ये एक तरह का डिजिटल रिस्पेक्ट भी बन गया है कि "चलो, लड़ते नहीं हैं, बस दूर हो जाते हैं." बिना किसी कड़वाहट के एक-दूसरे को ghost कर देना आजकल की नई मैच्योरिटी मानी जाने लगी है. लेकिन क्या ये वाकई मैच्योरिटी है या सिर्फ इमोशनल अनअवेबिलिटी?

ब्लू टिक का दिखना और उसके बाद रिप्लाई न आना, आज के वक्त का सबसे बड़ा मेंटल स्ट्रेस है.  जब आप ब्लॉक होते हैं, तो आपको पता होता है कि रास्ता बंद है. आप रोते हैं, दुखी होते हैं और फिर मूव ऑन कर जाते हैं. लेकिन 'Left on Read' होना आपको एक लूप में फंसा देता है. आप अपनी ही चैट को दोबारा पढ़ते हैं कि "कहीं मैंने कुछ गलत तो नहीं कह दिया?" "क्या वो बिजी है?" "क्या उनकी बात किसी और से चल रही है?" ये डिजिटल चुप्पी इंसान के Self-esteem को धीरे-धीरे खत्म कर देती है. ये एक ऐसी लड़ाई है जो सिर्फ आपके दिमाग में चल रही होती है. आजकल रिलेशन का एंड "Bye" से नहीं, बल्कि "Battery Low" वाले मोड में जाकर चुपचाप स्विच ऑफ होने जैसा है. ब्लॉक करना अब 'Old School' हो गया है क्योंकि उसमें गुस्सा दिखता है. आज का दौर 'Cool' दिखने का है, और कूल लोगों को फर्क नहीं पड़ता. लेकिन सच तो ये है कि वो ब्लू टिक और उसके बाद का साइलेंस किसी भी गाली या ब्लॉक से ज्यादा शोर करता है. ये हमें सोचने पर मजबूर कर देता है कि क्या हम इतने भी जरूरी नहीं थे कि हमें एक "बाय" ही कह दिया जाता? डिजिटल दुनिया ने हमें जोड़ने के लाख तरीके दिए, पर एक रिलेशन ग्रेसफुली खत्म करने का सलीका हमसे छीन लिया. अब हम ब्लॉक नहीं होते, बस घोस्ट हो जाते हैं.

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shivani doesn’t seek a title to fill a room. she is a quiet observer trying to understand the world. She wishes to be like rain falling on the sea, a quiet addition to a vast mystery. believing the best stories live between facts and feelings rather than in headlines, she writes about the invisible ways the world softens or breaks us. she isn't an expert at a finish line, but a traveler on the road, writing with a heart wide open to questions even when answers are few.