खुश कौन है...आप, मैं या कोई नहीं?

खुश कौन है…? आप, मैं या फिर कोई नहीं. आज के समय का सबसे बड़ा सवाल यही है. सोशल मीडिया पर हम बहुत खुश नज़र आते हैं, लेकिन क्या असल ज़िंदगी में भी हम उतने खुश हैं?

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असल ज़िंदगी में सुकून क्यों नहीं है. हर चेहरा हंसता दिखता है, लेकिन दिल की बात कोई नहीं कहता. आप कहते हैं सब ठीक है, लेकिन रातों की नींद अधूरी है.

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खुशी स्टेटस में तो दिखती है, लेकिन real life में नहीं. कोई मुझसे पूछे हाल तो मैं भी कहती हूं- 'all good yrr..' लेकिन अगर सोचूं तो फिर सवाल खड़ा हो जाता है.?

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आज के ज़माने में अपना दुख बताना कमजोरी माना जाता है. इसलिए लोग दर्द छुपाते हैं और खुशी ओढ़ लेते हैं, जबति सच ये है कि न आप पूरी तरह खुश हैं, न मैं और न ही कोई और

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खुशी कोई permanent चीज़ भी नहीं है कि हर समय इंसान खुश ही रहे. खुशी छोटे-छोटे पलों में आती है. भले ही थोड़ी देर के लिए, लेकिन आती ज़रूर है.

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आज शायद कोई खुश नहीं, लेकिन कल की उम्मीद हर कोई लगाए बैठा है कि कल हमारी भी किस्मत का सवेरा और हम सिर्फ whatspp status पर नहीं real में भी happy होंगे.

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असल में खुश वो है, जो उसी में खुश है जितना उसके पास है. कोई महलों में रहकर भी बेचैन है तो कोई छोटे से घर में मुस्कान ढूंढ लेता है. खुशी हालातों से नहीं, नज़रिये से आती होती है.

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